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योग के आसनों को एरोबिक्स का विकल्प समझने की भूल न करें। योग के आसनों को मन और शरीर के सम्मिलित योग से साधने की जरूरत होती है जबकि एरोबिक्स शरीर की एक यांत्रिक क्रिया भर है। योग के आसन कभी किताबों से सीखकर सिद्ध नहीं होते। इन्हें प्रशिक्षित योगाचार्यों से सीखना अच्छा होता है। इसकी वजह यह है कि योगासन करते समय अगर आप गलत ढंग से साँस ले रहे हैं तो आपको फायदे के स्थान पर नुकसान हो सकता है। इसकी वजह से आपके मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति में कमी हो सकती है और ब्लैक आउट भी हो सकता है। इससे हॉर्निया तक होने की आशंका रहती है।Prabha-Yadav-Yog-Power-Studio

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पैदल चलना और योगासन करना किसी के लिए भी सबसे सुरक्षित शुरुआती कसरत हो सकती है। योगासनों का चलन अनादि काल से जारी है। इसमें साँस लेने और आसन करने की असंख्य तकनीकें मौजूद हैं। पैदल चलने और एरोबिक्स की कसरतों में पसीना बहाने में भले ही कोई सुरक्षा तकनीक अपनाने की जरूरत हो लेकिन आसनों को तनाव शैथिल्य उत्पन्ना करने वाला माना जाता है, इसलिए विशेषज्ञ की निगरानी चाहिए। वे प्रशिक्षक जिन्हें आसन सिद्ध हो चुका है उनके शरीर में पर्याप्त लचीलापन है और वे श्वास-प्रच्छवास में महारत हासिल कर चुके हैं। वे ही आपको साँसों पर नियंत्रण साधने का मंत्र सिखा सकते हैं।

वार्मअप जरूर करें : किसी भी एक्सरसाइज से पहले वार्मअप करना ठीक होता है। सर्दियों में भी योगासनों की शुरुआत से पहले वार्मअप करना चाहिए। बिना वार्मअप किए एकाएक योगासन शुरू करने से शरीर के ठंडे ऊतक बहुत जल्दी क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। योगासनों को करने से पहले ढीले वस्त्र पहनें ताकि मूवमेंट आसान रहे। हमेशा साँस कब अंदर भरना है और कब छोड़ना है इस पर ध्यान दें। आसनों की शुरुआत से पहले ही साँस लेने की तकनीक सीख लें। आसन की तीन स्थितियाँ होती हैं। आसन की शुरुआती स्थिति, मध्य स्थिति एवं मोक्ष की स्थिति।

आसन कभी भी जल्दबाजी में नहीं किए जाते। योग का अर्थ है मन और शरीर का सम्मिलित प्रयास। एक स्थिति से दूसरी तक पहुंचने में धीरज रखें। धीरे धीरे शुरुआत करते हुए आसन की चरम स्थिति तक पहुंचे। इस स्थिति में थोड़ी देर रुकें। इस दौरान सांस की गति पर नियंत्रण हासिल होते ही आप महसूस करेंगे की आसन करना अब कितना सहज हो गया है। याद रखें कि योग कोई ऐसा खेल नहीं है जिसमें कोई हार या जीत होती हो।

कभी भी अपने योगाचार्य की भोंडी नकल करने का प्रयत्न न करें। योगाचार्य वर्षों के निरंतर अभ्यास के बाद आसन की चरम स्थिति तक पहुंच सके हैं। कभी भी क्लास के दूसर प्रशिक्षार्थियों से होड़ न करें। हर व्यक्ति का शरीर भिन्न होता है। इसलिए आप पहले दिन ही योगाचार्य की तरह आसन नहीं कर सकेंगे। याद रखें कि योगासनों का अभ्यास आपको दूसरी किसी भी कसरतों के मुकाबले अधिक खुश रखता है।

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