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लंदन – ब्रिटेन की पेट्रोलियम कंपनी केन एनर्जी ने कहा है कि वह भारत से 60 करोड़ डॉलर (करीब 4,058 करोड़ रुपये) से ज्यादा की क्षतिपूर्ति मांगेगी। यह क्षतिपूर्ति आठ साल पुराने आंतरिक कारोबार पुनर्गठन (इंटरनल बिजनस रीस्ट्रक्चरिंग) मामले में भारत द्वारा 10,247 करोड़ रुपये के टैक्स मांगने की वजह से उसके शेयरों के मूल्य में गिरावट से हुए नुकसान के एवज में मांगी जाएगी।msid

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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पिछली तारीख से लागू एक कानून का इस्तेमाल करते हुए जनवरी, 2014 में केन एनर्जी द्वारा 2006 में अपने आंतरिक कारोबार पुनर्गठन मामले में कंपनी के खिलाफ टैक्स असेसमेंट संबंधी आदेश का मसौदा जारी किया था। साथ ही उसने ब्रिटेन की इस कंपनी को केन इंडिया में अपनी 9.8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने से रोक दिया था। एक बयान में केन ने कहा कि उसने ब्रिटेन-भारत निवेश संधि के तहत भारत के इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के फैसले को चुनौती देने के लिए आर्बिट्रेशन अवॉर्ड की प्रक्रिया शुरू की है।

केन एनर्जी के सीईओ साइमन थॉमसन ने कहा, ‘पुराने टैक्स मामले में इंटरनैशनल आर्बिट्रेशन या मध्यस्थता की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। इस बारे में केन और भारत सरकार के बीच तीन अंतरराष्ट्रीय पंचों की नियुक्ति पर सहमति हो गई है। यह सहमति ब्रिटेन-भारत निवेश संधि की शर्तों के तहत बनी है।’
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