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बलूचिस्तान पाकिस्तान का पश्चिमी प्रांत है। बलूचिस्तान नाम का क्षेत्र बड़ा है और यह ईरान (सिस्तान व बलूचिस्तान प्रांत) तथा अफ़ग़ानिस्तान के सटे हुए क्षेत्रों में बँटा हुआ है। यहां की राजधानी क्वेटा है। यहाँ के लोगों की प्रमुख भाषा बलूच या बलूची के नाम से जानी जाती है। 1944,में बलूचिस्तान के स्वतंत्रता का विचार जनरल मनी के विचार में आया था पर 1947 में ब्रिटिश इशारे पर इसे पाकिस्तान में शामिल कर लिया गया और पाकिस्तान ने फौज और हथियार के दम पर बलूचिस्तान पर कब्जा कर लिया जिससे वहां विद्रोह भड़क उठा ।
1970 के दशक में एक बलूच राष्ट्रवाद का उदय हुआ जिसमें बलूचिस्तान में पाकिस्तान से स्वतंत्र करने की मांग उठी। बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तान की सेना अब तक 19 हजार बलूचिस्तान नागरिकों की हत्या कर चुकी है |
 
वर्तमान समय में पाकिस्तान ने आर्थिक तंगी के कारण चीन की मदद से 790 किलोमीटर के समुद्र तट वाले ग्वादर पोर्ट के इलाके को चीन को दे दिया है वर्तमान समय में चीन वहाँ बन्दरगाह तथा व्यावसायिक केंद्र बना रहा है जिससे पिछले कुछ सालों से वहाँ चीन ने अपना दखल बढ़ाया है जिससे वहाँ चीन के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया जो अब बेकाबू होता जा रहा है। इस आंदोलनों को बलूचिस्तान के तीन राष्ट्रवादी संगठन चला रहे हैं ।
इन तीनों संगठनों ने चीन को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने ग्वादर में अपना दखल नहीं छोड़ा तो उनकी खैर नहीं। इन संगठनों का आरोप है कि ग्वादर में चीन जो भी निवेश कर रहा है उसका असली मकसद योरोप अफ़्रीका आदि क्षेत्र से अपना व्यापार बढ़ाना है जिससे चीन का फायदा होगा बलूचिस्तान को नहीं और चीन बलूचिस्तान की प्राकृतिक संपदा का दोहन करेगा जो उसे लूटने की इजाजद नहीं दी जाएगी ।
 
दरअसल बलूचिस्तान के इस रेतीले इलाके में यूरेनियम, पेट्रोल, नेचुरल गैस, तांबा और ढेर सारी दूसरी धातु का बेशकीमती खजाना छिपा है । जिसे गुप्त रूप से पाकिस्तान ने चीन को पट्टे पर दे दिया है | इन संगठन ने राष्ट्ररक्षा के लिये बलूचिस्तान में काम कर रहे चीनी इंजीनियरों पर हमले भी तेज कर दिए हैं। बलूचिस्तान के लोग और नेता लगातार अपने आंदोलन को धार देते जा रहे हैं।
 
उनका दावा है कि जैसे 1971 में भारत के सहयोग से पाकिस्तान से कटकर बांग्लादेश अलग स्वतंत्र राष्ट्र बन गया था उसी तरह पुनः भारत के सहयोग से एक दिन बलूचिस्तान भी पाकिस्तान से अलग होकर स्वतंत्र राष्ट्र बनेगा।

उन्हे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उम्मीद है कि मोदी को बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई में मदद करेंगे. जिस पर प्रधानमंत्री ने कहा, अब वक्त आ गया है कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में हुए मानवाधिकार उल्लंघन के लिए दुनिया को जवाब दे और पाकिस्तान को यह जवाब देना ही होगा। मोदी जी के इस अभियान में अब ब्रिटेन, यूरोप, अमेरिका और अन्य देश बलूचिस्तान के नागरिकों के मानवाधिकारों के लिये मोदी के साथ खड़े हैं |

योगेश कुमार मिश्र
(ज्योतिष रत्न, अधिवक्ता एंव संवैधानिक शोधकर्ता ।)

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