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आज zee news की सच्ची और देशभक्त पत्रकारिता में एक और नगीना जुड़ गया. आज zee news ने अमेरिका के दोगलेपन को नंगा कर दिया है. Turkey के Antalia शहर में हुए G-20 सम्मलेन में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने साफ़ साफ़ बताया कि उनके पास पक्के सबूत हैं इस बात के, कि ISIS को करीब 40 देश आर्थिक मदद देते हैं, जिसमे G-20 के भी कुछ सदस्य देश शामिल हैं.

पुतिन के इसी भाषण के तर्ज़ पर आज zee news ने अमेरिका के दोगले चरित्र को पूरी तरह से expose कर दिया है. Religion of peace का काला और रक्तरंजित इतिहास तो हम सब जानते हैं, लेकिन…. इस धर्म को अपने फायदे के लिए अगर किसी देश ने सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया है, तो वो देश है अमेरिका, और इसको पूरा समर्थन दिया है उसके अपने पाले हुए कुछ पश्चिमी यूरोप के चेले चपाटों ने, जिसमे सबसे पहला नाम आता है ब्रिटेन का. ज़रा google में थोड़ा विस्तार से search करोगे, तो पता चलेगा कि अमेरिका और उसकी ख़ुफ़िया विभाग, CIA ने आतंक के खिलाफ युद्ध के नाम पर कितने देशों को आपस में लड़वाया है, कितने मोहरे बनाकर खुद ही उनको बाद में इसी युद्ध के बहाने मार डाला है, कितने अच्छे खासे देशों को लगभग खंडहर में तब्दील कर दिया है. यह अमेरिका ही था जिसने 80’s के दशक में दो शिया देश – ईरान और इराक को आपस में 8 सालों तक लड़वाया, एक युद्ध जिसमे chemical weapons का भी इस्तेमाल हुआ था, और जो द्वितीय विश्व युद्ध से भी ज़्यादा लम्बा चला था, और इसकी शुरुआत करवाई थी अमेरिका ने, इराक में अपने बनाये हुए तानाशाह प्यादे, सद्दाम हुसैन के द्वारा. लेकिन, इस युद्ध के खत्म होने के ठीक बाद सद्दाम हुसैन को समझ आ गया कि उसको किस तरह से अमेरिका ने अपने तेल से सम्बंधित हितों को साधने के लिए मोहरा बनाया था ईरान के खिलाफ, और फिर उसने अमेरिका के प्यादे देश, कुवैत पर कब्ज़ा कर लिया था, और उस खाड़ी युद्ध में अमेरिका ने अपने ही प्यादे का क्या हाल किया था, सबको मालूम है. यही formula Libya के कर्नल गद्दाफी और मिस्र के होस्नी मोबारक पर भी दोहराया था अमेरिका ने. इन दोनों को भी तो किसी ज़माने में अमेरिका ने ही खड़ा किया था, और ज़रुरत पूरा हो जाने के बाद इनको भी आतंक के खिलाफ युद्ध के नाम पर टपका दिया था, और दोनों देशों को भी तबाह कर दिया था. 

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