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हमारे देश के बहुत से धार्मिक स्थल चमत्कारों व वरदानों के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्हें में से एक है राजस्थान का प्रसिद्ध “खाटू श्याम मंदिर”. इस मंदिर में भीम के पोते और घटोत्कच के बेटे बर्बरीक की श्याम-रुप में पूजा की जाती है. कहा जाता है कि जो भी इस मंदिर में जाता है उन्हें बाबा का नित नया रुप देखने को मिलता है. कई लोगों को तो इनके आकार में भी बदलाव नज़र आता है. कभी मोटा तो कभी दुबला. कभी हंसता हुआ तो कभी ऐसा तेज भरा कि नजरें टिकाना मुश्किल हो जाता है.download

मान्यता है कि इस बालक में बचपन से ही वीर और महान योद्धा के गुण थे. इन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे तीन अभेद्य बाण प्राप्त किए थे. इसी कारण इन्हें तीन बाणधारी भी कहा जाता था. स्वयं अग्निदेव ने इनसे प्रसन्न होकर ऐसा धनुष प्रदान किया था  जिससे वह तीनों लोकों में विजय प्राप्त करने का सामर्थ्य रखते थे. महाभारत के युद्ध की शुरुआत में बर्बरीक ने अपनी माता के समक्ष इस युद्ध में जाने की इच्छा प्रकट की. उन्होनें माता से पूछा- मैं इस युद्ध में  किसका साथ दूँ? माता ने सोचा कौरवों के साथ तो उनकी विशाल सेना, स्वयं भीष्म पितामह, गुरु द्रोण, कृपाचार्य, अंगराज कर्ण जैसे महारथी हैं. इनके सामने पाण्डव अवश्य ही हार जाएँगे. ऐसा सोच वह बर्बरीक से बोली ” जो हार रहा हो तुम उसी का सहारा बनो.’’  बालक बर्बरीक ने माता को वचन दिया कि वह ऐसा ही करेंगे.

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