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DrDilip Kumar Nathani
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आज मैं आप सभी से निवेदन करता हूँ कि हमारे देश में रहने वाले भारतीयों के तीन रह वास हैं। नगर, ग्राम एवं वन। जो नगर में रहे वह नगरवासी, जो ग्राम में रहे वह ग्रामवासी एवं जो वनों में रहे वह वनवासी। इसमें ये आदिवासी शब्द कहाँ से आया?

हम आज आपको इस शब्द का अर्थ व इसके प्रयोग का षडयन्त्र बताते है… 
अँग्रेजों ने जब से भारत में समुद्र मार्ग से अपनी प्रथम अपवित्र पाँव पवित्र धरा रखा तभी से उनके मन में यह आ गया कि यहाँ की मूल व विश्व की सर्वश्रेष्ठ आर्य जाति को समाप्त करके अपनी राक्षसी व नीच बिमारी वाली गोरी चमड़ी को यहाँ बसाया जाय! इसके लिये उन्होंने धर्मान्तरण वाली गुण्डी गैंग को यहाँ बैठाया। एवं उस गुण्डी गैंग ने कई षडयन्त्र रचे। उनमें से सर्वप्रमुख है आर्यों का बाहर से आना। विश्व के इस सबसे बड़े महाझूठ के द्वारा उन्होंने लिखा कि आर्यों द्वारा भारत के मूल लोगों को दक्षिण में अथवा वनों में भाग जाने के लिये विवश करना!

अब यदि दक्षिण के लोग मूल निवासी है तो वे भी आदिवासी कहे जाने चाहिये पर वे नहीं कहे जाते! केवल जो वनों में रह रहे हैं वे ही आदिवासी हैं तो आर्यों के बाहर से आने सम्बन्धि जो तर्क दिया जा रहा है वो यहीं मिथ्या सिद्ध होता है कि आर्यों ने यहाँ के मूल निवासियों को दक्षिण में भगा दिया।

आदिवासी का अर्थ है जो यहाँ मूल निवासी हो। अत: यह शब्द हमारे और हमारे वनवासी आर्य भाईयों के मध्य सीमा रेखा खींचने वाला शब्द है। हम सभी नगरवासी, ग्रामवासी, एवं वनवासी है।

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