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ब्लॉग – रीवा सिंह हमारे यहां 2014 में आम चुनाव हुए थे। आम चुनाव मतलब लोकसभा वाले चुनाव जिसके भरोसे केंद्र में सरकार बनती है। दो सत्र तक मौनमोहन जी के संचालन के बाद कांग्रेस के जीतने की उम्मीद वैसे भी खत्म थी। सोनिया जी के हाथ में सरकार की रिमोट थी पर उन्हें भी पता था कि अब उनका ज़माना जाने वाला है। उनका ज़माना जाएगा तो आएगा किसका? इसपर हिंदुस्तानियों को ज्यादा विचार करने की ज़रूरत नहीं पड़ती। अपने कोपभवन वाले आडवाणी जी ने एक फैक्टर दिया था एक बार, यहां के लोग उसी पर चलते हैं। फैक्टर था TINA, मतलब There Is No Alternative. अगर कांग्रेस जाएगी तो भाजपा ही आएगी। इसलिए नहीं कि भाजपा-काल में रामराज्य आ जाता है। इसलिए नहीं कि ये सरकार संस्कृतियों की बहार लेकर आती है। इसलिए क्योंकि लोगों के पास कोई विकल्प ही नहीं है।

जबतक चुनाव में इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी कि भाजपा का चेहरा कौन बनेगा, मोदी के साथ-साथ एक और नाम उछाला जा रहा था। वो नाम था मामाजी का, अरे वही शिवराज सिंह चौहान। तर्क ये था कि गुजरात में नरेंद्र मोदी ने जितना विकास किया है उससे बेहतर विकास मध्यप्रदेश में शिवराज मामा ने किया है। लालकृष्ण आडवाणी मोदी से कहीं अधिक शिवराज के पक्ष में थे। अरे न-न! उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए नहीं। इसलिए क्योंकि मोदी के समकक्ष कोई खड़ा रहा तो आडवाणी जी की सीट पक्की रहेगी।

तो मोदी जी कितना काम कर रहे हैं ये आप देख ही रहे होंगे। मनमोहन जी बोलते नहीं थे, ये उनकी भी कसर पूरी कर रहे हैं। रविवार को ‘मन की बात’ के साथ आपका मनोरंजन.. माफ़ कीजिएगा, मार्गदर्शन भी हो रहा है। और योजनाएं तो इतनी हैं भैया कि डर लगता है सबके सब सक्रीय रहने लगीं तो भारत 4 दिन में टोक्यो न बन जाए। हमारे प्रधानसेवक जी की एक चीज़ और मशहूर है, और मशहूर भी इतनी कि आगरे का पेठा फेल है; वो है उनकी हवाई यात्रा। कायदे से उन्हें उड़यन मंत्रालय और विदेश मंत्रालय दोनों का कार्यभार मिलना चाहिए था। सुषमा जी तो बस खोया-पाया विभाग संभाल रही हैं।

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