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10th पास भारतीय ने बना दी पानी से चलने वाली कार, कर दिया पूरी दुनिया को हैरान

नई दिल्ली- पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि क्लास रूम के सबसे पिछले बैंच पर बैठे छात्र में भी देश का एक बेहतरीन दिमाग मिल सकता है। शायद आपको ‘सलम डॉग मिलिनियर’ फिल्म में होटल में काम करने वाला वह बच्चा भी याद होगा, जिसने एक टीवी रियलिटी शो के दौरान अपनी जिंदगी के तजुर्बों के आधार पर प्रोग्राम के मेजबान द्वारा पूछे गए मुश्किल से मुश्किल सवालों का बड़ी आसानी से माकूल जवाब देकर करोड़पति बन जाता है। ये कहानी भले ही फिल्मी है, लेकिन हकीकत की जिंदगी में भी कई ऐसे किरदार होते हैं जो बिना किसी औपचारिक शिक्षा के कोई ऐसा बड़ा कारनामा कर दिखाते हैं, जिसे देखकर दुनिया दातों तले ऊंगली दबाने का मजबूर हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि ज्ञान का एकमात्र और अंतिम स्रोत सिर्फ मोटी-मोटी किताबें, बड़े-बड़े नामचीन शिक्षण संस्थाएं और उनमें पढ़ाने वाले विद्वान शिक्षक ही नहीं है। कई बार रोज-रोज के अनुभवों से सीखी और समझी गई बातें ज्ञान प्राप्ति के दूसरे तरीकों पर भारी पड़ जाती है। शिक्षाशास्त्री भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि व्यावहारिक ज्ञान अधिगम का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।

ये कागज की डिग्रियां तय नहीं करेंगी मेरी काबिलियत को, मेरा काम ही मेरी पहचान होगा। जिंदगी का यह फलसफा मध्य प्रदेश के सागर जिला निवासी मोटर मैकेनिक रईश महमूद मकरानी पर बिल्कुल फिट बैठता है। देश और दुनिया के नामी इंजीनियरिंग संस्थानों से बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेने वाले लोग जो काम नहीं कर पाए वो काम कर दिखाया 10वीं पास शख्स ने। बना दी पानी से चलने वाली कार और कर दिया पूरी दुनिया को हैरान। मल्टीनेशनल कंपनियों को एक बार फिर भारतीय प्रतिभा का लोहा मानना पड़ा।  बिना किसी डिग्री वाले इस इंजीनियर के आगे आज दुनिया की तमाम कंपनियां हाथ नतमस्तक हैं। रईश को उम्मीद है कि जल्द ही उनकी कार मार्केट में आ जाएगी।

मध्यप्रदेश के सागर जिले के रहने वाले 10वीं पास 54 वर्षीय एक कार मैकेनिक रईश महमूद मकरानी ने इस तथ्य को सच साबित कर दिया है। मकरानी के दो आविष्कारों ने उन्हें देश-प्रदेश सहित पूरी दुनिया में मशहूर कर दिया है। पेट्रोल की बजाय पानी से चलने वाली कार और मोबाइल से कार ऑपरेट करने की उनकी तकनीक ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के होश उड़ा दिए हैं। सालों साल की मेहनत के बाद जो काम इंजीनियर्स नहीं कर पाए, उसे महज एक दसवीं पास मैकेनिक ने कर दिखाया है। इस कामयाबी के बाद कई देशों की नामी कंपनियां उनसे तकनीक बेचने या फिर उनके देश में आकर सेवा देने का आग्रह कर चुकी है। लेकिन मकरानी उनका ऑफर ठुकरा चुके हैं। वह अपनी तकनीक की इस्तेमाल प्रधानमंत्री के ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम के तहत सिर्फ देशवासियों और देश के लिए करना चाहते हैं।

आगे पढ़े – पृष्ठिभूमि व सफरनामा

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