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इतनी बेबाकी और इतना साफ़ बोलते हुए हमने आज तक किसी को नही सुना , ना कोई लाग लपेट ना ही कोई डर , ना TRP की चिंता , हो सकता है कुछ लोग सुरेश चव्हाण के इतने साफ़ विचारों में आक्रामकता की बू देखते हों लेकिन हर बात के 2 पहलु होते हैं , अगर बोलने का अधिकार है तो वो तो सबका ही होना चाहिए |

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