अब चीन और पाक की नापाक हरकत पर रहेगी अवाक्‍स की निगाह

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ये प्रणाली स्टेट ऑफ द आर्ट तकनीक से बनी है और हर मौसम में चाहे शर्दी हो या गर्मी, बरसातहो या तूफान सभी में काम कर सकती है। इसमें चलते हुये विमान में हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है जिसके चलते इसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। सबसे बड़ी बात यह है कि डीआरडीओ ने इसे वायुसेना की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया है जो उसकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरता है।

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2400 करोड़ की लागत से बने इस प्रोजेक्ट का पहला अवाक्स 14 फरवरी को भारतीय वायुसेना को मिल जाएगा। हालांकि वायुसेना के पास पहले से तीन अवाक्स हैं लेकिन वो स्वदेशी नहीं हैं। उसमें लगा रडार सिस्टम इजरायल का बना हुआ है।

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डीआरडीओ ने देश में निर्मित नया सिस्टम ब्राजील से खरीदे गए विमान एम्ब्रायर पर लगाया है। इसके कई परीक्षण सफल होने के बाद ही वायुसेना को सौंपा जा रहा है। अपना अवाक्स बनाकर भारत उन चुनिंदा पांच देशों की टीम में शामिल हो गया है जिनके पास खुद का बनाया हुआ अवाक्स है।

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