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भारत के अधिकांश भागों में अरबी की खेती की जाती है। अरबी का वानस्पतिक नाम कोलोकेसिया एस्कुलेंटा है। अरबी के पत्तों से बनी सब्जी बहुत स्वादिष्ट होती है। अरबी के कोमल पत्तों को भी सब्जी के रूप में खाया जाता है। आदिवासियों के अनुसार अरबी का कभी भी कच्चा सेवन नहीं करना चाहिए। इसकी पत्तियों और कंदों को भली-भांति उबालकर ही उपयोग में लाना चाहिए। आदिवासी भी इस पौधे की पत्तियों और कंदों को तमाम रोगों के इलाज के लिए हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाते हैं।

शिमला मिर्च को भी अरबी की ही तरह कौन नहीं जानता? हर हिंदुस्तानी रसोई में इसे देखा जा सकता है। इसे बड़े चाव से सब्जी के तौर पर खाया जाता है। शिमला मिर्च को अन्य सब्जियों में मिलाकर न सिर्फ उनकी रंगत बेहतर की जाती है, बल्कि इसे अन्य सब्जियों में मिलाने पर उनका जायका भी अच्छा हो जाता है। इसे भी आदिवासी अंचलों में हर्बल नुस्खे के तौर पर भी उपयोग में लाया जाता है।

अरबी और शिमला मिर्च की ही तरह फूलगोभी संपूर्ण भारत में सब्जी के तौर पर प्रचलित है और इसकी खेती भी लगभग सभी जगह की जाती है। हमारे देश की कोई ऐसी रसोई नहीं होगी, जहां फूलगोभी ना मिले। इसका वानस्पतिक नाम ब्रासिका ओलेरेसिया वेरा बोट्रायटीस है। फूलगोभी से कई तरह की स्वादिष्ट सब्जियां तैयार की जाती है, लेकिन बहुत ही कम लोग इसके औषधीय गुणों से परिचित हैं। यदि आप भी इससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान को जानेंगे तो निश्चित ही आश्चर्यचकित हुए बगैर नहीं रहेंगे। चलिए, आज जानते है अरबी, शिमला मिर्च और फूलगोभी से संबंधित आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान के बारे में।

अरबी-

  • अरबी की पत्तियों के डंठल को तोड़कर अलग कर लें। पत्तियों को जलाकर राख को नारियल तेल में मिलाकर फोड़े- फुंसियों पर लगाने से लाभ होता है।
  • इसके पत्तों में बेसन लगाकर भजिए बनाकर खाएं। ये भजिए जोड़ों के दर्द में कारगर दवा का काम करते हैं।
  • अरबी के पत्ते डंठल के साथ लेकर पानी में उबाल लें। इस पानी में थोड़ा घी मिलाकर 3 दिनों में दो बार लें। गैस की समस्या में फायदा होगा।
  • अरबी के पत्तों का रस 3 दिन तक पीने से पेशाब की जलन मिट जाती है।

  • अरबी की सब्जी खाने से प्रसूता स्त्रियों के स्तनों में दूध बढ़ता है।

  • अरबी के पत्तों की सब्जी बनाकर खाने से एसिडिटी दूर होती है।

  • सूखी खांसी की समस्या हो तो नियमित रूप से अरबी की सब्जी खाएं। कफ पतला होकर बाहर निकल जाएगा।

  • जले हुए स्थान पर अरबी पीसकर लगाने से छाले नहीं पड़ते और जलन भी खत्म हो जाती है।

  • कोई कीड़ा काट ले तो उस स्थान पर अरबी का रस लगाएं, दर्द से राहत मिलेगी।

  • अरबी का कंद शक्ति और वीर्यवर्धक होता है। इसकी पत्तियां शरीर को मजबूत बनाती हैं। अच्छी तरह से उबले कंदों में नमक मिलाकर खाने से नपुंसकता दूर होती है।

  • दिल से संबंधित रोग होने पर अरबी की सब्जी रोजाना खाने से लाभ होता है।

  • अरबी को पीसकर कुछ दिनों तक नियमित रूप से सिर पर लगाने से बाल गिरने की समस्या से छुटकारा मिल जाता है।

  • खूनी बवासीर की समस्या हो तो रोगी को नियमित रूप से अरबी का जूस पिलाने से फायदा होता है।

शिमला मिर्च

  • पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार शिमला मिर्च की सब्जी खाने से वजन कम होता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट और वसा कम मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए यह शरीर को फिट रखने में मददगार होती है।
  • जो लोग अक्सर शिमला मिर्च का सेवन करते हैं, उन्हें कमर दर्द, सायटिका और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं कम होती हैं। शिमला मिर्च में पाया जाने वाला प्रमुख रसायन केप्सायसिन दर्द निवारक माना जाता है।
  • शिमला मिर्च में भरपूर मात्रा में, विटामिन ए, बी और सी पाए जाते हैं। इसीलिए यह एक टॉनिक की तरह काम करता है।

  • शिमला मिर्च को आदिवासी कोलेस्ट्रॉल की अचूक दवा मानते हैं। आधुनिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि शिमला मिर्च शरीर की मेटाबॉलिक क्रियाओं को सुनियोजित करके ट्रायग्लिसेराईड को कम करने में मदद करती है।

  • आधुनिक शोधों के अनुसार शिमला मिर्च में बीटा केरोटीन, ल्युटीन और जिएक्सेन्थिन और विटामिन सी जैसे महत्वपूर्ण रसायन पाए जाते हैं। शिमला मिर्च के लगातार सेवन से शरीर बीटा केरोटीन को रेटिनोल में परिवर्तित कर देता है। रेटिनोल वास्तव में विटामिन ए का ही एक रूप है। इन सभी रसायनों के संयुक्त प्रभाव से दिल से संबंधित बीमारियों, ओस्टियोआर्थरायटिस, ब्रोंकायटिस, अस्थमा जैसी समस्याओं में जबरदस्त फायदा होता है।

  • शिमला मिर्च में लाइकोपिन भी पाया जाता है। यह तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्या को दूर करने में बहुत कारगर होता है।

  • शिमला मिर्च उच्च रक्त चाप (हाई ब्लड प्रेशर) के रोगियों के लिए बेहद फायदेमंद होती है।

  • फूलगोभी-

    • आदिवासियों के अनुसार फूलगोभी की पत्तियों के रस का सेवन गले की सूजन और गले से सबंधित अनेक विकारों को भी दूर करता है।
    • फूलगोभी को धोकर चबाने से खून साफ होता है और अनेक चर्मरोगों में आराम मिलता है।
  • लौह तत्व और प्रोटीन्स पाए जाने के कारण यह शरीर को शक्ति प्रदान करती है।
  • फूलगोभी और गाजर का रस समान मात्रा में तैयार कर 1 गिलास प्रतिदिन दिन में दो बार देने से पीलिया के रोगी को फायदा होता है।

  • गुजरात के आदिवासी इसी फार्मूले को हाथ-पैर और हड्डियों में दर्द की शिकायत करने वाले रोगियों को देने की सलाह देते हैं।

  • यदि प्रतिदिन खाली पेट एक कप गोभी के रस का सेवन किया जाए तो कोलाइटिस और पेट दर्द से संबंधित विकारों में आराम मिलता है।

  • रात को सोने से पहले गोभी का रस पी लिया जाए तो कब्जियत की समस्या में राहत मिलती है। जिन्हें अक्सर पेशाब में जलन की शिकायत हो, उन्हें फूलगोभी की सब्जी ज्यादा खानी चाहिए।

  • इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और लौह तत्व के अलावा विटामिन ए, बी, सी, आयोडीन, और पोटैशियम तथा थोड़ी-सी मात्रा में तांबा भी मौजूद होता है।

  • मसूड़ों से खून आने की समस्या हो तो फूलगोभी के पत्तों का रस बनाकर उससे कुल्ला करें। मसूड़ों से खून निकलना बंद हो जाएगा। फूलगोभी को चबाने से मसूड़ों की सूजन खत्म हो जाती है।

  • फूलगोभी के पत्तों के रस का सेवन गठिया के दर्द में भी लाभकारी होता है।
    कम से कम तीन माह तक इस रस का सेवन करते रहने से हर तरह के दर्द की छुट्टी हो जाती है।

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