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नीम को आयुर्वेद में एक बहुत ही उपयोगी वनस्पति माना गया है। नीम का प्रयोग अनेक रोगों में चमत्कारी असर दिखाता है। इसके प्रयोग से कई लाइलाज बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। इसके औषधीय गुणों के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसे इक्कीसवीं शताब्दी का वृक्ष घोषित किया है।

आदिवासी अंचलों में नीम को एक महत्वपूर्ण औषधीय वृक्ष के तौर पर देखा जाता है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन चिकित्सा ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। इसे ग्रामीण औषधालय का नाम भी दिया गया है। इस पेड़ की खासियत है कि इस पर कोई कीड़ा-मकोड़ा नहीं लगता, इसलिए नीम को आजाद पेड़ भी कहा जाता है। नीम की इसी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए आज जानते हैं नीम से जुड़े कुछ अनोखे और कारगर पारंपरिक नुस्खों के बारे में…

  • नीम की पत्तियों का जूस पीने से शरीर की गंदगी निकल जाती है। इससे बाल काले, घने और चमकदार हो जाते हैं। त्वचा की कांति बढ़ जाती है। डायजेशन सही हो जाता है।
  • निबौलियों को पीसकर रस तैयार करके बालों पर लगाया जाए तो जूएं मर जाती हैं।
  • घमौरियों से छुटकारा पाने के लिए नीम की छाल को घिसकर लेप तैयार कर लिया जाए और उन हिस्सों पर लगाया जाए जहां घमौरियां या फुंसियां हों तो आराम मिलता है। पानी में थोड़ी-सी नीम की पत्तियां डालकर नहाने से भी घमौरियां दूर हो जाती हैं।
  • नीम का पत्तियों का लेप बालों पर लगाने से बाल स्वस्थ रहते हैं और कम झड़ते हैं।

  • नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबालकर इस पानी से बाल धोने से बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।

  • निंबोली का चूर्ण बनाकर एक-दो ग्राम मात्रा रात को गुनगुने पानी से लें। यह नुस्खा कब्ज की समस्या में रामबाण है।

  • बिच्छू के काटने पर नीम के पत्ते मसल कर काटे गए स्थान पर लगाने से जलन नहीं होती है। साथ ही, ज़हर का असर कम हो जाता है।

  • डांग में आदिवासी लगभग 200 ग्राम नीम की पत्तियों को 2 लीटर पानी में उबालते हैं। जब पानी का रंग हरा हो जाता है, तब उस पानी को बोतल में छान कर रख लेते हैं। नहाते समय बाल्टी में 75 से 100 मिलीलीटर नीम के इस पानी को डाल लिया जाता है। जानकारों के अनुसार नहाने का यह पानी संक्रमण, मुंहासे और शरीर से पुराने दाग-धब्बों से छुटकारा दिलाता है।

  • नीम के रस की दो बूंदें आंखों में डालने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। यदि किसी को कन्गक्टवाइटिस हो गया है, तो वह भी जल्द ठीक हो जाता है।

  • नीम का महीने में 10 दिन तक सेवन करते रहने से कभी हार्ट अटैक नहीं होता।नीम के रस का उपयोग मलेरिया रोग में भी किया जाता है। नीम वाइरस को पनपने नहीं देता और लिवर की कार्यक्षमता को मजबूत करता है।

  • गुजरात (डांग) के आदिवासियों के अनुसार, नीम के गुलाबी कोमल पत्तों को चबाकर रस चूसने से डायबिटीज रोग मे आराम मिलता है।

  • नीम का जूस डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत लाभदायक है। रोजाना नीम का जूस पीने से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

  • कुछ आदिवासी नीम की पत्तियों के रस में दालचीनी का चूर्ण मिलाकर डायबिटीज के रोगियों को देते हैं। उसके परिणाम भी काफी अच्छे मिले हैं। हालांकि, इसका कोई क्लीनिकल और वैज्ञानिक प्रमाण अब तक देखने को नहीं मिला। फिर भी इस पारंपरिक नुस्खे को आजमाने में कोई बुराई नहीं है।

  • बुंदेलखंड में आदिवासी हर्बल जानकार बवासीर जैसे कष्टकारी रोग के इलाज के लिए नीम और कनेर के पत्ते की समान मात्रा लेकर लेप की सलाह देते हैं। इनका मानना है कि ये लेप लगातार एक सप्ताह तक लगाने से कष्ट कम होता जाता है।

  • मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के कोरकु आदिवासी मलेरिया में नीम के (तने के अंदर की) छाल को कूटकर कांसे के बर्तन में पानी के साथ कुछ देर के लिए उबालते हैं। फिर इसे एक कपड़े से छान लेते हैं। इन आदिवासियों के अनुसार, इस पानी को दिन में तीन बार मलेरिया के रोगी को दिया जाए तो मलेरिया दूर हो जाता है।

  • गर्मियों में लू लग जाने पर नीम के फूल, फल, पत्तियां, छाल और जड़ के चूर्ण को पानी मे मिलाकर पीने से लू का प्रभाव खत्म हो जाता है।

  • नीम के 25 ग्राम तेल में थोड़ा-सा कपूर मिलाकर यह तेल फुंसी या घाव आदि पर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है।

  • गठिया की सूजन पर नीम के तेल की मालिश करें, लाभ होगा।

  • नीम के पत्ते कीड़े मारते हैं, इसलिए पत्तों को अनाज में रखते हैं।

  • आदिवासियों के अनुसार, नीम के पत्ते और मकोय के फलों का रस समान मात्रा में लेकर पलकों पर लगाने से आंखों में लाली दूर हो जाती है।

  • डिलेवरी के समय लेबर पेन में आराम पाने के लिए नीम के रस से मसाज करना चाहिए। दर्द कम महसूस होता है।

  • गले की सूजन दूर करने के लिए (5 ग्राम) नीम की पत्तियां, 4 काली मिर्च, 2 लौंग और चुटकी भर नमक को मिलाकर काढ़ा बनाकर लें। इसका सेवन दिन में तीन बार करें। गुजरात के आदिवासी इस नुस्खे को रामबाण मानते हैं।

  • नीम की 20 पत्तियां पीसकर एक कप पानी में मिलाकर पीने से हैजा ठीक हो जाता है।

  • निंबोली का तेल लगाने से जलने का घाव जल्दी भर जाता है।

  • नीम का फूल तथा निंबोलियां खाने से पेट के रोग नहीं होते।

  • नीम की जड़ को पानी में उबालकर पीने से बुखार दूर हो जाता है।

  • छाल को जलाकर उसकी राख में तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर लगाने से दाग-धब्बे दूर हो जाते हैं।

  • नीम के तेल से मालिश करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। नीम का लेप भी सभी प्रकार के चर्म रोगों के निवारण में सहायक है।

  • नीम की दातुन करने से दांत व मसूढ़े मजबूत होते हैं और दांतों में कीड़ा नहीं लगता है। मुंह से दुर्गंध आना बंद हो जाता है।

  • नीम के रस में सेंधा नमक मिलाकर मंजन करने से पायरिया, दांत-दाढ़ का दर्द आदि दूर हो जाता है।

  • नीम की कोंपलों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से दांतों का दर्द दूर हो जाता है।

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