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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत नौ मुस्लिम संगठनों ने गुरुवार को तीन तलाक पर सरकार के रुख का विरोध किया है. संगठनों ने कहा है कि उन्हें इस मामले में कोई दखल मंजूर नहीं होगा. उनहोंने विधि आयोग द्वारा जारी प्रश्नावली को भी बहिष्कार करने का ऐलान किया है. संगठन ने केंद्र के मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि“वह यूनिफार्म सिविल कोड(UCC) लाकर देश को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. ट्रिपल तलाक पर सरकार का विरोध गलत है.”

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इस पूरे मामले पर केंद्रीय कानूनमंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “केंद्र सरकार का तलाक पर अपने रुख पर समीक्षा करने का कोई इरादा नहीं है. यह लैंगिक समानता और महिलाओं के सम्मान के लिए उठाया गया कदम है” पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव का कहना है कि समान नागरिक संहिता भारत जैसे देश के लिए नहीं है. देश में कई संस्कृतियाँ है जिनका सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा है कि मुस्लिम समाज पर्सनल लॉ में किसी का भी हस्तक्षेप पसंद नहीं करता है. इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा, कि यहां अलग-अलग धर्म के लोग रहते हैं, सभी लोग एक संविधान के मुताबिक रह रहे हैं. सरकार इसको तोड़ने की कोशिश कर रही है.

अगले पेज पर पढ़ें क्या है यूनिफार्म सिविल कोड और आखिर क्यों हो रहा है इसका विरोध…

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