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दिल्ली – दूसरी कंपनियों के सरसों तेल को अपने विज्ञापन के जरिए नुक्सानदायक और मिलावटी बताने वाली पतंजलि आयुर्वेद अब बैकफुट पर आ गई है। अपने दावे को साबित नहींं कर पाई पतंजलि अब खाद्य नियामक के दबाव में विज्ञापन वापस लेने की तैयारी में है।

मिली जानकारी के अनुसार पतंजलि अपने सरसों तेल का विज्ञापन बदलने को तैयार है। हालांकि उसे अभी तक फूड सेफ्टी स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफ एस एस ए आई) की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। पतंजलि के सरसों तेल के विज्ञापन की शिकायत एडिबल ऑयल कंपनियों की संस्था सॉल्वैंट एक्सट्रैक्शन एसोसिएशन (एस ई ए) ने एफ एस एस ए आई में की थी।

पतंजलि के उत्पाद को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। पतंजलि के ‘आटा नूडल्स’ पर सवाल उठे कि उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले एफ .एस.एस.ए.आई. से मंजूरी नहीं ली गई। यह मामला अभी एफ.एस.एस.ए.आई. के पास है।

पतंजलि ने इस टुथ पेस्ट में कई आयुर्वैदिक इनग्रेडिएंट होने का दावा किया था, जिससे दांतों को फायदा होता है। यह दावा सही साबित नहीं हुआ और इसके विज्ञापन को भ्रामक विज्ञापन कहा गया।

पतंजलि द्वारा बनाया जाने वाला आंवला मुरब्बा तब विवादों में आ गया जब उसे मैन्युफैक्चरिंग डेट के काफी पहले ही बाजार में उतार दिया गया। यह मामला ड्रग एंड कॉस्मैटिक एक्ट 1940 के उल्लंघन का माना गया था।

भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (ए. एस. सी. आई.) ने पतंजलि आयुर्वेद के बालों के ऑयल उत्पाद केश कांति संबंधी विज्ञापन को भ्रामक पाया था। परिषद का कहना था कि कंपनी विज्ञापन में किए गए दावों के समर्थन में कोई क्लीनिकल साक्ष्य पेश नहीं कर पाई है।

दिव्य फॉर्मेसी की पुत्रजीवक दवा पर भी पिछले साल काफी विवाद हुआ था। यह मामला संसद में भी उठा कि दवा के जरिए बेटा पैदा होने की गारंटी देना पूरी तरह गलत है और दवा पर तुरंत बैन लगे या नाम बदला जाए। हालांकि इस मसले पर रामदेव का कहना था कि दवा पर कहीं भी नहीं लिखा है कि इससे बेटा पैदा होने की गारंटी है।

विवाद पतंजलि के सरसों के तेल के विज्ञापन पर है, जिसमें कहा गया है कि कुछ तेल बनाने वाली कंपनियां कच्ची घानी के लिए न्यूरोटॉक्सिक हैक्सागॉन सॉल्वैंट एक्सट्रैक्शन प्रोसैस का इस्तेमाल करती हैं। हैक्सॉन को सेहत के लिहाज से खतरनाक बताया गया है।

वहीं कुछ कंपनियां सरसों का तेल बनाने में सस्ते पाम ऑयल का इस्तेमाल करती हैं। एस.ई.ए. का कहना है कि यह विज्ञापन भ्रामक है, इससे दूसरी कंपनियों की साख पर असर पड़ सकता है।

इस मामले में पतंजलि को अपना पक्ष रखने का एक अवसर मिलेगा। उनकी ओर से जवाब का इंतजार किया जाएगा। अगर विचार करने के बाद जवाब संतोषजनक नहीं होगा तो कार्रवाई आगे बढ़ेगी। यहां तक कि उत्पाद बनाने का लाइसैंस भी रद्द हो सकता है।’’

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