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New Delhi – रूस और भारत के बीच बहुत जल्द ट्रेन चलने लगेगी| यह ट्रेन रूस के सेण्ट पीटर्सबर्ग और फिनलैण्ड के हेलसिंकी नगरों से होते हुए भारत में मुंबई तक चलेगी| शुरुआत में इस रूट पर मालगाड़ियां चलेंगी| रूस और भारत के बीच मालगाड़ियां इसी अगस्त से चलने की संभावना है| यह उतरी-दक्षिणी प्रोजेक्ट का रूट हेलसिंकी से मुंबई तक 7 हजार किलो मीटर की दूरी तय करेगा| इस रेल से चार देश रूस, अजरबैजान, ईरान और भारत जुड़ेंगे| अंग्रेजी अखबार रशिया- इंडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रूस रेलवे के प्रथम अलिक्सान्दर मिशारीन ने कहा, शुरू में हम इस नए रेलमार्ग पर मालगाड़ियां चलाकर देखेंगे|

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इस रूट पर पहली मालगाड़ी मुंबई से आगामी 7 अगस्त को मास्को के लिए रवाना होगी| अजरबैजान रेलवे के अध्यक्ष जावेद गुरबानफ ने कहा कि आने वाले तीन-चार हफ्तों में ऐसी पहली ट्रेन अपनी मंजिल की तरफ रवाना होगी| उन्होंने बताया कि इस नए रेलमार्ग का रास्ता मुंबई से ईरान के बेन्देर-अब्बास बन्दरगाह तक पहुंचेगा|

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उतरी-दक्षिणी गलियारे का सक्रियता से इस्तेमाल शुरु कर दिया जाएगा| इस तरह उतरी-दक्षिणी गलियारे नामक इस रास्ते को पहली बार इस्तेमाल करके देखा जाएगा| अजरबैजान रेलवे जल्द अस्तारा से ईरान की सीमा तक रेल लाइन बिछाने का काम पूरा करेगी| गौरतलब है कि 12 सितंबर 2000 को रूस के सेण्ट पीटर्सबर्ग नगर में रूस, ईरान और भारत ने अन्तरराष्ट्रीय परिवहन गलियारे उतरी-दक्षिणी का निर्माण करने के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे|

यह समझौता 21 मई 2002 से लागू हो गया| बाद में 2005 में अजरबैजानन भी इस समझौते में शामिल हो गया और वह भी परियोजना में सहयोग करने लगा| उतरी-दक्षिणी गलियारी परियोजना के अन्तर्गत रेल लाईन बिछाने का काम पूरा होने के बाद यह गलियारा अन्य वैकल्पिक अन्तरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों के मुकाबले बड़ा फायदेमंद होगा|

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इसकी वजह से फारस की खाड़ी से यूरोप तक मालों की ढुलाई बहुत कम समय में और बहुत कम लागत पर होने लगेगी, जिससे बड़ा आर्थिक लाभ होगा| इस परियोजना में शामिल सभी देशों के विशेषज्ञों का यह मनना है कि उतरी-दक्षिणी गलियारे के बन जाने से इससे जुडें चारों देशों (रूस, अजरबैजान, ईरान, भारत) को बड़ा फायदा होगा| जब मुंबई से सेण्ट पीटर्सबर्ग और हेलसिंकी तक जाने वाले इस रास्ते पर मालगाड़ियों के साथ-साथ यात्री गाड़ियां भी चलने लगेंगी तो यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला एक लोकप्रिय रास्ता बन जाएगा|

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