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महाराष्ट्र में किसानों की दुर्दशा बेहद ही दयनीय है। राज्य सरकार ने बीते दिन बॉम्बे हाई कोर्ट को यह जानकारी दी कि साल 2015 में महाराष्ट्र में 1000 किसानों ने आत्महत्या की।

सरकार ने किसानों के हित के लिए कई योजनाएं पेश की, जिसपर कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि आत्महत्याओं की संख्या बढ़ी है या घटी हैं। इसी सवाल के जवाब में सरकार की तरफ से यह आंकड़ा सामने आया है।farmer suicide

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किसानों की मौत के मामले पर कोर्ट अब खुद संज्ञान ले रही है। यह संज्ञान एक जनहित याचिका के रूप में लिया गया है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि किसानों को लेकर जो योजनाएं बनाई गई है, उन्हें मात्र कागज़ तक ही सिमित न रखा जाए, उन योजनाओं को अमल में भी लाया जाए। अब तक मीडिया रिपोर्ट्स में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा 600 बताया जा रहा था, लेकिन सरकारी वकील अभिनंदन वाग्यानी ने यह जानकारी दी है कि यह आंकड़ा 600 को पार करता हुआ 1000 तक जाता है।

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी बताया कि नेशनल ब्यूरो ऑफ क्राइम रिकॉर्ड्स के माने तो बीते 5 सालों में महाराष्ट्र में 15,978 किसानों ने आत्महत्या की है।

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