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रक्षा विशेषज्ञों के पठानकोट हमले को देखने के दो अलग अलग नजरिए सामने आ रहे हैं। कुछ कहते हैं कि जिस तैयारी के साथ ये आतंकी आए थे, उससे ऐसा लगता है कि ये किसी बड़े सिविल हमले को भी अंजाम दे सकते थे। दिल्ली में आतंकी होने की खबर के बाद ये आशंका और गहरा गई है कि इनका मकसद 26-11 हमले की तरह ही मासूमों का कत्लेआम करना हो सकता है।

ऊधमपुर और सीमा पर हुए कुछ अन्य हमलों में सेना के बेस कैंप को निशाना बनाने की कोशिश की गई, लेकिन आमतौर पर हिंदुस्तान ने आतंकवाद का दंश मासूमों के कत्लेआम के तौर पर ही झेला है। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमला करने की तैयारी थी, लेकिन इसके बाद वो यहां से क्या करना चाहते थे, ये साफ नहीं हो पाया है।  

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कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यहां सेना के प्लेन और दूसरी तकनीकी चीजों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना इस आतंकी हमले का मकसद दिखाई पड़ता है। तो इस आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि ये हमले की एक कड़ी भर हो सकता है और इसके आगे आतंकी यहां रहने वाले सैनिक परिवारों या स्कूल को भी निशाना बना सकते थे। हमारे 7 जवान शहीद हो गए, लेकिन उन्होंने कई मासूमों की जिंदगियों को बचा लिया।

बड़े हमले को नाकाम करने का ये एक पहलू है, लेकिन कई रक्षा विशेषज्ञों का बहुत स्पष्ट मत है कि ये आतंकी हमला हमारी सुरक्षा एंजेसियों की खामियों को उजागर करता है। हम बड़ा हमला रोकने में कामयाब नहीं हुए बल्कि हम पर बड़ा हमला हो गया है। हमारे सैन्य एयरबेस में आतंकियों का घुसना और तीन दिन तक सुर्खियों में बने रहना ये बताता है कि आतंकियों के हौसले कितने बुलंद हैं। वहीं 7 जवानों का शहीद होना और कईयों का घायल हो जाना भी इसे एक छद्म युद्ध की शक्ल ही देता है।

इस हमले को बिना पूरी तैयारी के इतना बड़ा रूप नहीं दिया जा सकता था। जाहिर है ऐसी तैयारी के लिए पाकिस्तान सेना और आईएसआई का पूरा समर्थन आतंकी संगठनों को मिला है। दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की शुरूआत के साथ ही ये हमला हो जाना इस बात को भी साफ करता है कि ये भारत के साथ-साथ पाकिस्तान को भी एक संदेश है। यहां नवाज शरीफ से बात करने का कोई फायदा नहीं।

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