ये JNU है या राशन कार्ड की दुकान?

विडियो JNU से आया है. इसे देख कर राष्ट्रवादी खूब ठहाके मार रहे हैं

फिब्रल, वामपंथी छात्रों की सोच (जिनमें अधिकटार, अधेड़ उम्र के हो चुके हैं) कितना कर आगे जा सकती है वह निचे दिखाए गये विडियो से साफ़ हो जाता है.

ये विडियो JNU से आया है. इसे देख कर राष्ट्रवादी खूब ठहाके मार रहे हैं

फिब्रल, वामपंथी छात्रों की सोच (जिनमें अधिकटार, अधेड़ उम्र के हो चुके हैं) कितना कर आगे जा सकती है वह निचे दिखाए गये विडियो से साफ़ हो जाता है.

इन्हें लगता है कि इस तरह की नौटंकी करके कोई इन्हें free-thought, free-culture इत्यादि का मसीहा समझेगा लेकिन भैया, लोग देख देख के यही कह रहे हैं की क्या मुर्ख हैं जिनपे हमारे टैक्स का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो रहा है!

इस देश में ऐसे लोग भी हैं जो समझते हैं की कुछ चीजें, प्राइवेट में ही ठीक हैं. उनकी निष्ठा मर्यादाओं में है. इसी देश में ऐसे  भी लोग हैं जो सोचते हैं की Public Display of Affection इत्यादि, पर प्रतिबन्ध नहीं होना चाहिए (सेक्शन 294). वो मानते हैं कि नागरिकों को kiss इत्यादि अपनी इच्छानुसार कहीं भी करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए.

लेकिन, ऐसे नमूने आपको वामपंथी टोली में ही मिलेंगे जो किसी भी चीज़ को भद्दी नौटंकी की शक्ल दे सकते हैं.