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एक दिन सम और दूसरे दिन विषम संख्या की नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को चलने की इजाजत देने वाला केजरीवाल सरकार का फैसला बीमारी की जड़ से ज्यादा उसके लक्षणों का इलाज करने की कोशिश है. air pollution_delhi
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बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक अहम ऐलान किया है. एक जनवरी से दिल्ली में एक दिन आधी कारें सड़क पर चलेंगी और दूसरे दिन बाकी आधी कारें. यानी एक कार महीने में ज्यादा से ज्यादा 15 दिन ही सड़क पर रहेगी. आधी-आधी कारों का यह बंटवारा सम और विषम संख्या वाली नंबर प्लेटों के आधार पर किया गया है.

दिल्ली दुनिया का सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला शहर बन गया है. यही वजह है कि बीते कुछ समय से यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में रहा है. इसी साल अप्रैल में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने आदेश दिया था कि 15 साल से पुरानी गाड़ियों को दिल्ली की सड़कों पर चलने न दिया जाए. अक्टूबर में शहर में पहली बार कार फ्री डे का प्रयोग हुआ. अब यह फैसला आया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश सहित देश के मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर तक तमाम हस्तियों ने इस फैसले की सराहना की है. जस्टिस ठाकुर ने कहा है कि वे खुद अपने साथी जजों के साथ कार पूल करेंगे.

बात सीधी सी है कि आधी से ज्यादा गाड़ियां सड़क से हट जाएंगी तो प्रदूषण अपने आप ही नीचे आ जाएगा. लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? 

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