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इस संत शिविर में सारे शिष्य हैं विदेशी

सिंहस्थ में एक संत शिविर ऐसा भी है, जहां सारे शिष्य विदेशी हैं। उनमें से कोई अपने देश में डॉक्टर तो कोई इंजीनियर है, मगर उन्हें सनातन धर्म की गहराई यहां खींच लाई है। अब वे यहां शिविर में झाडू लगाते हें, कचरा उठाते हैं ओर भोजन के समय पूरी व्यवस्था भी संभालते हैं। विदेशी शिष्यों का यह पुण्य कार्य मेला क्षेत्र में सदावल रोड स्थित महामंडेलश्वर महेश्वरानंद पुरी के शिविर में देखने को मिल सकता है। दुनिया की चकाचौंध को छोड़कर विदेशी लोग यहां अध्यात्म की गहराई को समझ रहे हैं। गुरू के प्रति सम्मान ऐसा कि जब महेश्वरानंदपुरी मंच पर होते हैं तो ये अनुयायी मंच के नीचे बैेठ उन्हें ध्यान से सुनते हैं और गुरू के आदेशानुसार धर्मप्राण जनता की सेवा में जुट जाते हैं।

गुरूदेव से करते हैं अंग्रेजी में बात- महेश्वरानंदजी के अलखपुरी सिद्धपीठ परंपरा शिविर में बड़ी संख्या में विदेशी लोग रहते हैं। अधिकतर हिंदी नहीं जानते। इस कारण गुरूदेव खुद अंग्रेजी में बातचीत कर उन्हें शिविर के कामों के बारे में बताते हैं। 71 वर्ष के ये गुरू जब भी अनुयायियों के बीच आते हैं तो सभी बड़ी श्रद्धा से उनके पैर छूते और आशीर्वाद लेते हैं।
गु़रू चरणों में लेट जाते हैं- शिविर में आए हिंदू भक्तों की तरह ये विदेशी मेहमान भी हाथ जोड़कर बड़ी विनम्रता से अभिवादन करते हैं और अपने गुरू के चरणों में लेटकर वंदना भी करते हैं।
 इंजीनियर हैं क्रियाशक्ति- यहां सेवा कर रहीं क्रियाशक्ति सिविल इंजीनियर हैं । वे किचन में सब्जी काटने से लेकर सफाई में मदद करती हैं। स्लोवेनिया की सेवादेवी खाने के समय पटले बिछाती हैं। ये डेंटिस्ट हैं। मगर यहां वे ध्यान मग्र होकर माला जपती हैं।
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