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Image Source: महाभारत

भगवान कृष्ण ने निकला था युद्ध के दिन का मुहूर्त दिवाली के दिन शुरू हुआ था महाभारत का महायुद्ध, कुरुक्षेत्र की धरती पर थे द्वेष छोटी सी बहस पे एक किसान ने अपने ही भाई का वंहा किया था खून। महाभारत के युद्ध के ऐसे कुछ तथ्य जिनसे आप अब तक अनजान होंगे, पांडवो का नेतृत्व युधिष्ठर तो कौरवो का दुर्योधन कर रहा था।

युद्ध की रणनीति पांडवो की कृष्ण और कौरवो की शकुनि कर रहा था तैयार, पांडवो के पास सात अक्षयोनि सेनाये थी तो कौरवो के पास ग्यारह की संख्या में थी। पांडवो के पास 153090 रथ और उनके साथी थे तो कौरवो के पास 240570 की गिनती में थे। 153090 हाथी और हाथी  सवार योद्धा थे पांडवो के पास तो कौरवो के पास 240570 हाथी और सवार थे।

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पांडवो के लिए पहले दिन से अठारहवें दिन तक धृष्टद्युमय सेना पति थे जबकि कौरवो के लिए पहले से दसवे दिन भीष्म, ग्यारहवे से पंद्रहवे दिन द्रोणाचार्य और सलाह व् सत्रहवें दिन कर्ण था सेना पति आखिरी दिन शल्य थे कौरवो के सेना पति। पांडवो के पास 459270 घोड़े और घुड़सवार थे जबकि कौरवो के पास 721710 की संख्या में थे, पैदल सैनिक पांडवो के पास 765450 थे तो कौरवो के पास 1202850 की संख्या में थे।

कुल मिला के पांडव सेना 1530900 थी तो कौरव सेना 2405700 थी, पांडवो की तरफ से पांच पांडव कृष्ण सत्याकी और युयुत्सु बचे थे तो कौरवो में कृपाचार्य अश्वथामा कृतवर्मा और वृषकेतु जीवित बचे थे। ये महायुद्ध के आंकड़े विकिपीडिया से लिए गए है, हालाँकि भारत का महाग्रंथ महाभारत भी इसकी पुष्टि करता है।

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स्रोतtherednews
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