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पूतना पूर्वजन्म में कौन थी ?

भागवत में लिखा है – ‘ पूतना लोकबालघ्नी राक्षसा रुधिराशना।’ (10|6|35) ‘ पूतना संसार के बालकों की हत्या करने वाली राक्षसी थी।’ ‘ पूतना बालघातिनी।’ (10|6|2) ‘ पूतना बालहत्यारी थी।’ ‘ विबुध्य तां बालकमारिकाग्रहम्।’ (10|6|8) ‘ उसे बालकों को मारने वाला हौआ समझकर’ ‘ बालग्रहस्तत्र विचिन्वती शिशून्।’ (10|6|6) (बच्चों को खोजती हुई वह बालिकाओं के लिये हौआ रुप बनी हुई पूतना) इत्यादि। अतः यह बालकों को लगने वालीएक भूतनी या राक्षसी है। यह प्रायः नित्य है और इस कथा का तात्पर्य ‘रक्षोघ्नकृत्य’ से है।

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