loading...

ied-01_650x400_51448533737

loading...
जम्मू: मिस्र के सिनाई में इसी माह 224 सवारों के साथ एक रूसी मेट्रोजेट विमान को जिस बम के जरिये मार गिराया गया था, वह भारतीय सेना के बम डिस्पोज़ल स्क्वाड के विशेषज्ञों के लिए कोई नई चीज़ नहीं है…

ied-02_650x400_71448533418इस तरह के बम को सबसे पहले जम्मू एवं कश्मीर में लगभग दो दशक पहले देखा गया था, जब इसका रूप ‘सोडा कैन’ का था… इस इम्प्रोवाइज़्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (improvised explosive device – आईईडी) को असेम्बल करना, यानी तैयार करना काफी आसान होता है, और इसका असर एक हैन्ड ग्रेनेड जैसा ही होता है, अगर इसमें एक किलो आरडीएक्स (RDX) जैसा कोई प्लास्टिक विस्फोटक भरा हुआ हो…

किसी आधुनिक विमान के उड़ते वक्त हवा का जो दबाव रहता है, वह ‘सोडा कैन बम’ को कहीं अधिक घातक बना देता है… विमान में इसका विस्फोट न सिर्फ एयरफ्रेम को तोड़ डालेगा, जिससे केबिन डी-कम्प्रेस हो जाएगा, और यात्रियों का दम घुट जाएगा, बल्कि यह विमान के ढांचे को भी इतना नुकसान पहुंचा देगा कि विमान नीचे जा गिरेगा…

1 of 7
CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें