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इस्लाम ने अमन और शांति की स्थापना और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व को कितना ज़रूरी ठहराया है और वह ख़ून खराबा, मारकाट और आतंकवाद का कितना घोर विरोधी है, इसे समझने के लिए यही काफ़ी है कि इस्लाम ने मानव जीवन को काबे से ज़्यादा सम्मानित ठहराया है। मानव जीवन के प्रति यह सम्मान किसी विशेष धर्म, जाति, रंग, नस्ल, वर्ग या क्षेत्रवासियों के लिए ना होकर सबके लिए है। कुरान शरीफ़ की सूरत अलमाइदा की आयत नंबर 32 में साफ़ है कि किसी एक व्यक्ति की जान बचाना, सभी इंसानों की जान बचाने और किसी एक की जान लेना सभी इंसानों की हत्या करने जैसा है।

भारतीय मुसलमान: इस्लाम के तहत आदमी को जीवन रक्षा का अधिकार और दूसरों की जान की हिफ़ाज़त की गारंटी देने को कहा गया है। ‘जियो और जीने दो’ का यह संदेश जिस दौर में दिया गया था तब यह दुनिया के लिए अजनबी चीज़ थी।

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