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आज अपने देशद्रोही जेएनयू और रोहित वेमुल्ला समर्थकों के साथ राहुल गांधी पहुँचे जन्तर मंतर….

जेएनयू में देशविरोधी और देश के टुकड़े करने वाले उमर खालिद जैसे लोगो को फिर बताया देशभक्त और कहा मैं तन-मन-धन से जेएनयू के साथ हूँ।

देशभर के कई बुद्धिजीवी, पत्रकार और संपादक कश्मीर में शहीद हुए जवानों पर सोशल मीडिया में आंसू बहा रहे हैं। उनमें ही वो लोग भी हैं जो जेएनयू में कश्मीर की आजादी के नारे लगाने वाले आरोपी छात्रों का साथ भी दे रहे हैं। ऐसे लोगों का दोहरा चरित्र ये है कि ये शहीद हुए जवानों पर आंसू बहाते हैं, लेकिन अपने आंसुओं का एक कोटा उन लोगों के लिए भी आरक्षित कर लेते हैं जो जवानों की शहादत का जश्न मनाते हैं, जो देश को तोड़ने की सोच रखते हैं। विंडबना ये है कि ऐसे दोहरे चरित्र वाले पत्रकार और संपादक मीडिया और सोशल मीडिया पर पत्रकारिता के नाम पर रोना-धोना करते हैं और यह बताते हैं कि देश में पत्रकारिता किस हाल में पहुंच गई है? ऐसे लोगों को आइने के सामने खड़े होकर खुद से सवाल करने चाहिए।

देशद्रोह के आरोपियों के आगे सिस्टम बेबस क्यों?

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