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tasleema on france closed 20 mosques

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सोसियल कॉलम – इस्लामिक कट्टरता की वहज से बढ़ रहे आतंकवाद को देखते हुए फ्रांस की सरकार ने कड़े फैसले लेने शुरू कर दिये हैं। फ्रांस सरकार ने दिसंबर 2015 से अब तक पिछले 7-8 महीनों में कट्टरता का पाठ पढ़ाने वाले 20 मस्जिदों और प्रार्थना हॉल को बंद कर दिया गया है और उन पर बैन लगा दिया है।

फ़्रांस सरकार के अधिकारियों को कहना है कि इन मस्जिदों में लोगों को इस्लाम से जुड़े कट्टर विचार सिखाए जा रहे थे। इन मस्जिदों के बंद होने की जानकारी फ्रांस के ग्रहमंत्री बर्नार्ड कैजेउन्वे ने दी। ग्रहमंत्री बर्नार्ड ने ट्वीट के जरिए कहा, ” दिसंबर 2015 से कट्टरता के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत 20 मस्जिदों को बंद कराया जा चुका है।”

फ्रांस सरकार के इस फैसले पर बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने सहमति जताते हुए सवाल पूछा है कि बाकि देश ऐसा फैसला कब लेने वाले हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “फ्रांस में कट्टरता सिखाने के आरोप में 20 मस्जिदों पर ताला लग चुका है। बाकि मुस्लिम देशों का क्या? क्या उन्हें ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए?”

सोमवार(1 अगस्त, 2016) को ग्रहमंत्री बर्नार्ड ने बताया था, “फ्रांस में मस्जिदों और प्रेयर हॉल्स में नफरत फैलाने वालों के लिए इस देश में कोई स्थान नहीं है। इसलिए हमने कुछ महीने पहले यह फैसला किया कि आपात स्थिति के जरिए मस्जिदों को बंद कर दें। अब तक 20 मस्जिदें बंद की जा चुकी है और कुछ दूसरी मस्जिदों पर भी यह कार्रवाई की जाएगी। France 24 न्यूज चैनल के मुताबिक फ्रांस में स्थित 2500 मस्जिद और प्रार्थना हॉल्स में से करीब 120 मस्जिद फ्रांस के अधिकारियों के शक के घेरे में थीं। इनमें धार्मिक विचारों के प्रचार के नाम पर चरमपंथ की शिक्षा दी जाने के आरोप हैं।

तस्लीमा नसरीन के ट्वीट पर कई लोगों ने समर्थन जताया। जहां किसी ने कहा कि इस्लाम का एक ही लक्ष्य है- दूसरों को तवाह करना, तो किसी ने कहा कि फ्रांस सरकार आम लोगों के लिए काम करती हैं, वहीं अन्य देशों में वोट बैंक की राजनीति खेली जाती है।

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