loading...

141414

loading...

जैसे सूर्य सारे सौरमण्डल को उष्णता प्रदान करता है, वैसे ही सूर्यभेदी प्राणायाम से शरीर के सम्पूर्ण नाड़ी-मंडल में ऊष्मा का संचार हो जाता है।

लाभः इससे सूर्य नाड़ी क्रियाशील हो जाती है।

सर्दी, खाँसी, जुकाम दूर हो जाते हैं व पुराना जमा हुआ कफ निकल जाता है। मस्तिष्क का शोधन होता है।

इससे जठराग्नि प्रदीप्त होती है।

कमर के दर्द में यह लाभदायी है।

विधिः प्रातः पद्मासन अथवा सुखासन में बैठकर बायें-नथुने को बंद करें और दायें नथुने से धीरे-धीरे अधिक-से-अधिक गहरा श्वास भरें। श्वास लेते समय आवाज न हो इसका ख्याल रखें।

अब अपनी क्षमता के अनुसार श्वास भीतर ही रोके रखें।

श्वास बायें नथुने से धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। झटके से न छोड़ें। इस प्रकार 3 से 5 प्राणायाम करें।

सावधानियाँ- इस प्राणायाम का अभ्यास सर्दियों में करें। गर्मी के दिनों में तथा पित्तप्रधान व्यक्तियों के लिए यह हितकारी नहीं है।

स्वस्थ व्यक्ति उष्णता तथा शीतलता का संतुलन बनाये रखने के लिए सूर्यभेदी प्राणायाम के साथ उतने ही चन्द्रभेदी प्राणायाम भी करे।

CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें