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sukhad

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सुखद प्राणायम – कैसी भी थकान हो भाग जायेगी और सुख चैन का अनुभव होगा | पूरक किया अगर गरम ऋतू है गरमी जैसे मार्च, अप्रैल, मई, जून है उन दिनों में करना है तो श्वास बाहें नाक से लें… रोके जितने देर रोक सकते है | फिर दाहें से छोड़े| ऐसे १ – २ बार खाली बाहें में से लें … गरमी का कुप्रभाववाली उर्जा पैदा हो जायेगी | ज्यादा बाहें से लेंगे तो भूख मर जायेगी | गरमी मिटाना है तो १ – २ बाहें लें लिया | सर्दी मिटाना है १ – २ दाहें से बढ़ाना |जितनी देर सहज में रोक सके… बलपूरक नहीं | रोकें …फिर मुहँ से श्वास ऐसे छोड़े.. जैसे होठों से जैसे सिटी बजाते है ना ऐसे श्वास छोड़े … रुक – रुक के छोड़े … ३ बार रुक रुक के छोड़े उसके बाद आखिरी में बलपूर्वक छोड़े… फु ….. ऐसे ५ – ७ करने से बड़ा सुख होगा स्वभाव की खिन्नता चली जायेगी | स्वभाव में सुख आयेगा|

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