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idthइंदौर – अपने गांव के युवाओं को पढ़ाने के लिए 40 साल के प्रांजल दुबे ने सॉफ्टवेयर कंपनी की नौकरी छोड़ दी। गांव के युवाओं को पढ़ाने का इस कदर जुनून था कि उन्होंने अपना घर भी बेच दिया। एमपी के देवास जिले के संदलपुर के रहने वाले प्रांजल का सपना है कि गांव का कोई भी युवा बेरोजगार न रहे। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपना सबकुछ त्याग दिया। उनके कॉलेज के 100 से भी ज्यादा स्टूडेंट आज बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियों में जॉब कर रहे हैं।

प्रांजल ने कहा, ‘नौकरी छोड़ना और शहर का इकलौता घर बेचना बहुत कठिन फैसला था। लेकिन मैं समझता हूं कि हम सभी को ऐसे मुश्किल हालात में कोई न कोई फैसला लेना ही पड़ता है। मुझे और मेरी फैमिली को यह समझने में पूरे दो साल लग गए कि मैं अभी तक क्या कर रहा था और बेगलुरु की अच्छी-खासी जिंदगी छोड़ने के बाद मुझे क्या करना है।’

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शहर छोड़ने के बाद प्रांजल अपने पैतृक गांव संदलपुर वापस आ गए और गांव में ही संत सिंगाजी इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस ऐंड मैनेजमेंट की स्थापना की। कॉलेज शुरूआत करने के बाद वह अपने पहले बैच की पूरी टीम ( जिसमें कुल 50 स्टूडेंट थे) को 2010 में बेंगलुरु समेत देश के कई शहरों में ले गए ताकि स्टूडेंट अपने लाइफ के लिए कुछ बड़ा सोच सकें।

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उन्होंने कहा, ‘मेरा बैकग्राउंड, पढ़ाई और पालन-पोषण गांव के बाकी बच्चों से काफी अलग था। मैंने अपने जीवन में जो कुछ भी देखा था उससे ये बच्चे अनजान थे। इनके सपनों को प्रज्जवलित करने के लिए कई मल्टीनैशनल कंपनियों में ले गया।

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