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शीतल पेय (सॉफ्टड्रिंक्स) में पेस्टीसाइडस और एसिड अत्यधिक नुकसानकारक मात्रा में मौजूद हैं। डीडीटी से कैंसर, रोगप्रतिकारक शक्ति का ह्रास और जातीय विकास में विकृति होती है। लींडेन से कैंसर होता है तथा मस्तिष्क और चेता तंत्र (नर्वस सिस्टम) को हानि होती है। मेलेथियोन ज्ञानतंतुओं की हानि करता है और भावी पीढ़ियों को आनुवंशिक विकृतियों का शिकार बनाता है। इनमें कार्बोलिक एसिड होने की वजह से ये खतरनाक हैं, जिनका सेवन नहीं किया जा सकता है। ʹसेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरोनमेंटʹ की निदेशक तथा प्रख्यात पर्यावरणविद् सुनीत नारायण ने बाजार में मौजूद तमाम कम्पनियों के सॉफ्टड्रिंक्स के नमूनों की जाँच करवायी और सारे नमूनों में खतरनाक मात्रा में पेस्टीसाइडस पाये गये, जो उपयोगकर्ता के स्वास्थ्य को गम्भीर नुकसान पहुँचाते हैं। महाराष्ट्र के ʹफूड एंड ड्रग्सʹ विभाग ने अपनी जाँच में पाया था कि ये पेय छात्रों के स्वास्थ्य का सत्यानाश कर रहे हैं। (संदर्भः लोकमत समाचार)

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