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सीत्कारी या सित्कार एक प्राणायाम का नाम है। इस प्राणायाम को करते समय ‘सीत्‌ सीत्‌’ की आवाज निकलती है, इसी कारण इसका नाम सीत्कारी कुम्भक या प्राणायाम पड़ा है
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कैसे करें- सिद्धासन में बैठकर दांत पर दांत बैठाकर (मुंह खुले हुए) उसके पीछे जीभ को लगाकर, धीरे-धीरे मुंह से श्वास को अंदर खिंचें। बाद में त्रिबन्धों के साथ कुम्भक करें। कुछ देर बाद श्वास को नाक से निकाल दें और पुन: श्वास को अंदर खिंचें। यह ‍प्रक्रिया 10 से 12 बार करें। इसके करने से मुंह के अंदर का भाग सूखने लगता है।

इसके लाभ : इस प्राणायाम के अभ्यास से शरीर में ऑक्सिजन की कम दूर होती है और शारीरिक तेज में वृद्धि होती है। मूलत: यह चेहरे की चमक बढ़ाकर सौंदर्य वृद्धि करता है। इसके अभ्यास से भूख-प्यास, नींद आदि नहीं सताते तथा शरीर सतत स्फूर्तिवान बना रहता है।

इससे शरीर में स्थित अतिरिक्त गर्मी समाप्त होती है जिससे पेट की गर्मी और जलन कम हो जाती है। इसके नियमित अभ्यास से ज्यादा पसीना आने की शीकायत दूर होती है।

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