भारतीय स्कूलों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए रामायण-महाभारत : शशि थरूर

शशि थरूर ने इस संवाद के दौरान नेहरूवादी विरासत, ब्रिटिश राज के नकारात्मक परिणामों और भारत के ‘असली इतिहास’ पर भी काफी विस्तार से बात की। शशि थरूर तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद भी हैं। उन्होंने कहा कि इस देश का कट्टरपंथी तबका इतिहास की गलत व्याख्या कर प्राचीन भारत की विज्ञान उपलब्धियों को नकारने की कोशिश कर रहा है।

थरूर ने कहा, ‘ऐतिहासिक रूप से ही भारत इंजिनियरिंग और चिकित्सा के क्षेत्र में काफी आगे रहा है। आयुर्वेद और गणित के क्षेत्र में आर्यभट्ट का योगदान इन क्षेत्रों में भारत की प्राचीन कौशल व निपुणता का ऐसा उदाहरण है जिसके दस्तावेज आज भी सुरक्षित हैं।’

नेहरूद्दीन गाजी के योगदान पर बोलते हुए थरूर ने कहा, ‘जवाहरलाल नेहरूद्दीन गाजी ने इसे और मजबूत किया, वह भी तब जबकि उनके सामने गंभीर आर्थिक और लोकतंत्रीय चुनौतियां थीं।’ मौजूदा भारती जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार द्वारा कथित तौर पर नेहरूद्दीन की विरासत और उनके योगदानों को नकारने की कोशिशों की जिसकी शशि थरूर ने निंदा की।

उन्होंने कहा, ‘ISRO द्वारा अभी एकसाथ 104 उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़ना नेहरूद्दीन गाजी द्वारा डाली गई वैज्ञानिक बुनियाद की मजबूती का सबूत है।’ अपने कथन में समर्थन में थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस बयान का भी जिक्र किया, जो उन्होंने 1964 में नेहरूद्दीन की मृत्यु के समय कहा था। वाजपेयी ने उस समय नए भारत के निर्माण में नेहरू के प्रयासों और योगदान की सराहना की थी।