भारतीय स्कूलों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए रामायण-महाभारत : शशि थरूर

लखनऊ : कांग्रेस के सांसद शशि थरूर का कहना है कि महाभारत और रामायण जैसे महाकाव्यों को धार्मिक किताब की तरह नहीं, बल्कि साहित्य की तरह स्कूलों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए। शशि थरूर यह भी मानते हैं कि इन महाकाव्यों की सूझबूझ से सांप्रदायिक बंटवारे को खत्म किया जा सकता है।

लखनऊ के श्री रामस्वरूप मेमोरियल यूनिवर्सिटी में कल शनिवार को आयोजित साहित्यिक सम्मेलन के दौरान अपनी ताजातरीन किताब ‘एन एरा ऑफ डार्कनेस’ पर आयोजित संवाद के दौरान शशि थरूर ने ये बातें कहीं।

यह पूछे जाने पर कि स्कूली बच्चों को ब्रिटिश राज की विरासत के ‘प्रतीक’ शेक्सपियर की किताबें पढ़ाना कितना सही फैसला है ?

शशि थरूर ने कहा, ‘शेक्सपियर को स्कूलों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए, लेकिन साथ में संस्कृत के कवियों और कालिदास जैसे लेखकों की रचनाओं को भी बराबर महत्व दिया जाना चाहिए।

दुनिया के किसी भी अन्य महान लेखक की तुलना में कालिदास किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं थे।’ उन्होंने कहा कि कालिदास को स्कूली पाठ्यक्रम से बाहर रखकर हम नई पीढ़ी को उनकी संस्कृति और मौलिक पहचान के बड़े हिस्से से दूर रख रहे हैं।