loading...

modi adani

loading...

यह खबर आपने भी सुनी होगी कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अडानी ग्रुप पर लगा 200 करोड़ का जुर्माना माफ कर दिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी इस खबर के बाद मोदी सरकार पर जोरदार हमले हो रहे हैं। लेकिन जो सच्चाई सामने आई है उसके मुताबिक यह बोगस खबर सरकार को बदनाम करने के लिए छपवाई गई थी। तथ्य यह है कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने यह जुर्माना माफ नहीं किया है और यह भी संभावना है कि अडानी समूह को इससे भी अधिक सज़ा भुगतना या जुर्माना भरना पड़े।

क्या है यह पूरा मामला?

मामला गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के निर्माण का है। इसे अडानी समूह ने बनाया था। बंदरगाह को बनाने में पर्यावरण के नियमों को ताक पर रख दिया गया था। इसके लिए 2013 में मनमोहन सरकार के वक्त अडानी समूह पर 200 करोड़ का जुर्माना ठोंका था। तब इसे कॉरपोरेट जगत पर पर्यावरण से जुड़ा सबसे बड़ा जुर्माना माना गया था। यह जुर्माना पर्यावरणविद सुनीता नारायण की कमेटी की सिफारिश के आधार पर लगाया गया था। इसके मुताबिक यह जुर्माना 200 करोड़ से ज्यादा नहीं हो सकता था। मोदी सरकार के आने के बाद जब इस फैसले की पड़ताल हुई तो पाया गया कि पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत ऐसे किसी जुर्माने का प्रावधान ही नहीं है। अगर कंपनी ने इस जुर्माने को कोर्ट में चैलेंज कर दिया तो वहां से जुर्माने पर खुद ही रोक लग जाएगी, क्योंकि यह जुर्माना कानून के हिसाब से सही नहीं था। सुनीता नारायण ने इस पैसे को एनवायरमेंट रिलीफ फंड में डालने को कहा था। इस पैसे को पर्यावरण को नुकसान की भरपाई में इस्तेमाल किया जाना था। जबकि कानून ऐसा कोई फंड मौजूद ही नहीं है। अप्रैल 2014 में खुद मनमोहन सरकार ने भी इस बात को माना था।

अडानी पर पहले से भी सख्त जुर्माना

पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया है कि सरकार कड़ी शर्तें रख रही है जिससे अडानी समूह को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए मजबूर किया जा सके। मतलब साफ है कि सरकार ने 200 करोड़ के जुर्माने का आदेश वापस नहीं लिया है, बल्कि इसकी जगह ऐसी शर्तें थोपी गई हैं जिससे अडानी समूह को इससे भी अधिक की भरपाई करनी पड़ जाएगी। साथ ही वो सरकार के आदेश पर कोर्ट से स्टे भी नहीं ले पाएंगे। इससे पहले एनजीटी गुजरात के ही हजीरा पोर्ट में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के एवज में अडानी ग्रुप पर 25 करोड़ का जुर्माना ठोक चुका है।

सुनीता नारायण की भूमिका भी सवालों में
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की सुनीता नारायण की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि मुंद्रा पोर्ट के पास पर्यावरण को हुए भारी नुकसान के बावजूद उन्होंने जुर्माना सिर्फ 200 करोड़ क्यों रखा? क्यों इस जुर्माने में जानबूझ कर कानून के हिसाब से गलतियां की गईं, ताकि इस पर आराम से कोर्ट का स्टे लिया जा सके? अगर यह सही है तो उन्होंने ऐसा किसके कहने पर किया?

इन सवालों के जवाब देने के लिए खुद सुनीता नारायण अब तक आगे नहीं आ रही हैं।

CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें