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झांसी के जालौन जिले में 8 साल की दिव्‍या रोजाना रेलवे स्‍टेशन पर पढ़ाई करने के लिए पहुंच जाती है।

झांसी- घर में छाया अंधेरा, फिर भी नहीं बुझी पढ़ाने की आरजू। कुछ ऐसी ही तस्‍वीर यूपी के जालौन जिले से सामने आई है। यहां एक गरीब घर की बच्‍ची रोजाना रेलवे स्‍टेशन पर आकर अपनी कॉपी किताब खोलकर बैठ जाती है। पढ़ाई पूरी होने के बाद व‍ह वापस घर पर चली जाती है। कई बार रात को वह रेलवे स्‍टेशन पर ही सो जाती है।

पढ़ने के स्‍कूल से मिला ड्रेस-किताब लेकिन झोपड़ी में नहीं मिली लाइट
जालौन जिले के तिवारी अपने परिवार के साथ उरई रेलवे स्‍टेशन के पास एक झोपड़ी में रहते हैं।  इनकी 6 साल की बेटी दिव्या प्राइमरी स्कूल में क्‍लास 2 की छात्रा है। दिव्‍या की मां मोनिका ट्रेनों में भिक्षा मांगकर अपने घर का पेट पालती हैं, जबकि तिवारी मजदूरी करते हैं। बड़ी मुश्किल से 2 वक्‍त की रोटी का प्रबंध हो पाता है। झोपड़ी में बिजली का कनेक्शन भी नहीं है। फिर भी दिव्‍या के पढ़ने-लिखने के शौक को देखते हुए उसका सरकारी स्कूल में एडमिशन कराया है। स्कूल से उसे किताबें-ड्रेस तो मिल गईं, लेकिन झोपड़ी में लाइट नहीं आने के कारण वह पढ़ नहीं पाती थी। इसलिए वह पास की स्थित रेलवे स्‍टेशन पर चली जाती है और वहीं रोशनी में बैठकर पढ़ाई करती है। अक्‍सर वह स्‍कूल ड्रेस में ही होती है। लोगों आते-जाते रहते हैं। रेलवे का अनाउंसमेंट और ट्रेन का शोर होता रहता है। लेकिन दिव्‍या बिना कहीं ध्यान दिए जमीन पर कॉपी-किताब फैलाए पढ़ती रहती है।

Next स्लाइड पर पढे- अफसर बनना चाहती है दिव्या 

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