अपने जमाने में कई महिलाओं के साथ शारीरिक संबंधों के लिए

नोबेल पुरस्कार विजेता और मशहूर कवि रवींद्रनाथ टैगोर के बारे में तो सब लोग जानते होगे. लेकिन उनकी प्रेम कहानी के बारे में बहुत कम लोग हैं जो जानते है. रवींद्रनाथ टैगोर और अर्जेंटीना की प्रसिद्ध लेखिका विक्टोरिया ओकैंपो की प्रेम कहानी। 

सन 1914, अर्जेंटीना में 25-26 साल की एक लड़की ने फ्रेंच में रवींद्रनाथ टैगोर की  किताब गीतांजलि पढ़ी. विक्टोरिया टैगोर की लेखनी की मुरीद हो गई. उसके बाद से विक्टोरिया रवींद्रनाथ टैगोर से मिलने के लिए बेताब हो गई. वो कोई सामान्य लड़की नहीं थी बल्कि बहुत बड़ी नारीवादी लेखिका एक साहित्यिक मैग्जीन की एडिटर, सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी थी. वो वहां की पहली महिला थी जिसे अर्जेंटीना एकेडमी ऑफ लैटर्स का सदस्य भी बनाया गया था। 

1924 में विक्टोरिया की टैगोर से मुलाकात की तमन्ना पूरी हुई. रवींद्रनाथ टैगोर उस वक्त पेरु की यात्रा पर थे, रास्ते में बीमार हुए तो आराम करने के लिए उन्हें ब्यूनस आयर्स में रुकना पड़ा. विक्टोरिया को जैसे ही ये खबर मिली वो उनसे मिलने पहुंच गईं. टैगोर को ठहराने के लिए वहां एक कमरा किराए पर लिया जहां वो 2 महीने से ज्यादा रुके थे.

आगे पढ़िए 34 साल की विक्टोरिया को कैसे हुआ 63 साल के टैगोर से प्यार