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गर्मियों के दिनों में दूध से बने पदार्थों का सेवन करना शरीर के लिए बहुत फायदेमद माना जाता है जैसे कि दही, पनीर व छाछ। यह सब चीजें ज्यादा गर्मी में हमें ठंडक देती हैं।

जो भोरहि माठा पियत है, जीरा नमक मिलाय !
बल बुद्धि तीसे बढत है, सबै रोग जरि जाय !!

अाज हम अापको गर्मियों में हर रोज छाछ का सेवन करने के बारे में बताएगें। इसे पीने से न केवल अापको ठंडक मिलती है बल्कि हमारे चेहरे में चमक भी अाती है। खास बात तो यह है कि अगर अाप खाना खाने के बाद छाछ पीएगे तो इसे जोड़ों के दर्द से भी राहत मिलती है। इसलिए अाज हम अापको गर्मियों में हर रोज छाछ पीने से होने वाले फायदों के बारे में बताएगें। तो अाइए जानते हैं…

  • आंवले के चूर्ण के साथ दही का सेवन करने से शरीर के सभी दोष दूर होते है।
    दही का सेवन वर्षा, हेमन्त और शिशिर में नही करना चाहिए।
  • नियमित् रूप से दही का सेवन करने से शीत एवं संक्रामक रोग नही होते है।
    दही से हमारे शरीर को भरपूर कैल्शियम, प्रोटीन, जिंक, राइबोफ़्लेविन तथा विटामिन B-12 मिलता है, इसके नियमित सेवन से हमारे शरीर की रोगों से लडने की शक्ति बढती है।
  • मट्ठा बनाने की विधि:: दही में बिना पानी मिलाए अच्छी तरह से मथ कर थोडा मक्खन निकालने के बाद जो अंश बचता है उसे मट्ठा कहते है, ये वात एवं पित्त दोनो का परम शत्रु है।
  • तक्र बनाने की विधि :: दही में एक चौथाई पानी मिलाकर अच्छी तरह से मथ लर मकखन निकालने के बाद जो बचता है उसे तक्र कहते है, तक्र शरीर में जमें मैल को बाहर निकालकर वीर्य बनाने का काम करता है, ये कफ़ नाशक है
  • छाछ बनाने की विधि :: दही में मलाई निकालकर पांच गुना पानी मिलाकर अच्छी तरह मथने के बाद जो द्रवय बनता है उसे छाछ कहते है। छाछ में सैंधा या काला नमक मिलाकर सेवन करने से वात एवं पित्त दोनो दोष ठीक होते है। छाछ वायु नाशक है और पेट की अग्नि को प्रदिप्त करता है। ताजा मट्ठा, तक्र और छाछ दिल की दडकन वाले रोगियों के लिए अम्रत है। छाछ का स्वभाव शीतल होता है।
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