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माँ एक ऐसा शब्द है जिसे सुनने के बाद हर किसी के अंदर एक प्रेम की भावना जागने लगती है l एक छोटा बच्चा सबसे पहले माँ शब्द को ही बोलना सीखता है और माँ कि छाया में ही बड़ा होता है l “यूं तो मैं बतलाता नहीं तेरी ही परवाह करता हूँ मैं माँ ” ऐसे ही कई गाने माँ के लिए समर्पित हैं साथ ही आपने कई कविता माँ के लिए सुनी होंगी लेकिन क्या कभी आपने पापा के लिए कोई कविता सुनी है ? घर में पापा वो इंसान है जो कभी प्यार को दर्शाता नहीं है पर माँ से भी बढ़कर अपने बच्चों को प्यार करते हैं l माँ घर में रोटी बनाती है तो पिता कड़ी धूप में पैसा कमाता है, माँ बच्चे को पढ़ाती है तो पिता बच्चे को शिक्षा देता है l एक पिता जितनी कुर्बानी देना आसान बात नहीं, फटे जूते पहन बच्चों को नए कपड़े दिलाता है पिता,लेकिन कभी अपना प्रेम नहीं दर्शाता है पिता, माँ लाख बार बोले मेरा बेटा..मेरी बेटी पर जीवन जीना पिता सिखाता है l

देखिए ऐसे ही एक पिता के लिए इस कवि ने ऐसी कविता लिखी है जिसे सुनकर आप अपने पिता को याद किए बिना नहीं रह पाएंगे ..!

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video : अगले पेज पर देखिए कैसे पिता की इस कविता ने सबको रुला दिया ! 

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