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माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी,

पेशे से पत्रकार हूं। पत्रकार यानि आजकल का सबसे बदनाम पेशा, अब तक लोग घर बैठकर मन ही मन कोसते थे लेकिन हाल के दिनों में परिस्थितियां बदली है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बढ़ी और राष्ट्रभक्ति जगी तो लोग सड़कों पर भी निकलने लगे हैं। हम पत्रकारों के नाम मात्र के अस्तित्व को जाने बगैर अलग अलग संगठन के लोग जोर आजमाइश भी करने लगे हैं, माइक-कैमरा के साथ बदसलूकी तो दूर अब सीधे पत्रकारों को ही निशाना बनाया जा रहा है। खैर इन सब बातों में उलझने के बजाए हम सीधे मुद्दे पर आते हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में गुप्त मतदान की व्यवस्था है, लेकिन आज मैं सार्वजनिक रूप से कह रहा हूं कि मैने लोकसभा चुनाव में बदलाव के लिए वोट किया था, आपकी अगुवाई वाली बीजेपी को वोट किया था। बहुत हुआ महिलाओं पर अत्याचार, अबकी बार मोदी सरकार, यही नारा दिया था न आपने।

मोदी जी, सच कहूं तो हिल गया हूं, जब से मुरथल की खबरें सुन रहा हूं। माना जाता है कि जब रोम जल रहा था तो वहां का सम्राट नीरो बंसी बजा रहा था, वही कुछ हरियाणा के मुरथल में हुआ। हरियाणा जाने से डरने लगा हूं, इसलिए नहीं कि आरक्षण की मांग कर रहे कुछ वहशी दंगाइयों ने हमारी मां-बहनों के साथ क्या किया, बल्कि इसलिए कि खाकी वर्दी पहन पुलिस ने जो कायरता दिखाई। इसलिए भी, कि कैसे खट्टर सरकार ने  30 फीसदी जाट वोटों के लिए न सिर्फ आंखें मूंद ली बल्कि मामला सामने आने के बाद भी बुझे मन से जांच कमिटी की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया।

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