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पांडुरोग

पहला प्रयोगः लोहे की कढ़ाई में 5-7 काली मिर्च डालकर उबाला हुआ 200 मि.ली. दूध में पीने से पाण्डुरोग में लाभ होता है। यह प्रयोग हीमोग्लोबीन की कमी को भी पूरा करता है।

दूसरा प्रयोगः ताजे आँवले का पाँच तोला (लगभग 60 ग्राम) रस एवं 2 तोला (लगभग 24 ग्राम) शहद मिलाकर पीने से पाण्डुरोग में लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः सुबह 4 से 6 ग्राम धात्री लौह चूर्ण दूध या गौमूत्र के साथ लेना चाहिए।

चौथा प्रयोगः रक्ताल्पता अर्थात् रक्त की कमी दूर करने के लिए पालक की सब्जी का नियमित सेवन करें व आधा गिलास पालक के रस में दो चम्मच शहद मिलाकर 50 दिन पियें। इससे लाभ होता है।

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पीलिया

पहला प्रयोगः एक केले का छिलका जरा-सा हटाकर उसमें 1 चने जितना भीगा हुआ चूना लगायें एवं रात भर ओस में रखें। सुबह उस केले का सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है।

दूसरा प्रयोगः आकड़े की 1 ग्राम जड़ को शहद में मिलाकर खाने अथवा चावल की धोवन में घिसकर नाक में उसकी बूँद डालने से पीलिया में लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः 5-5 ग्राम कलमी शोरा एवं मिश्री को नींबू के रस में लेने से केवल छः दिन में पीलिया में बहुत लाभ होता है। साथ में गिलोय का 20 से 50 मि.ली. काढ़ा पीना चाहिए।

चौथा प्रयोगः आँवला, सोंठ, काली मिर्च, पीपर (पाखर), हल्दी और उत्तम लोहभस्म इन सबको बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। दो आनी भार (करीब 1.5 ग्राम) जितना चूर्ण दिन में तीन बार शहद के साथ लेने से पीलिया का उग्र हमला भी 3 से 7 दिन में शांत हो जाता है।

पाँचवाँ प्रयोगः पीलिया में गौमूत्र या शहद के साथ 2 से 4 ग्राम त्रिफला देने से एक माह में यह रोग मिट जाता है।

छठा प्रयोगः दही में मीठा सोडा डालकर खाने से भी लाभ होता है।

सातवाँ प्रयोगः जामुन में लौहतत्त्व पर्याप्त मात्रा में होता है अतः पीलिया के रोगियों के लिए जामुन का सेवन हितकारी है।

पथ्यः पीलिया में केवल मूँग एवं चने ही आहार में लें। गन्ने को छीलकर एवं काटकर उसके टुकड़ों को ओस में रखकर सुबह खाने से पीलिया में लाभ होता है।

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