loading...

जो कम्पनी अमेरिका के लोगों को उल्लू बना सकती है वह भारत में कितना बड़ा घोटाला करती होगी?922852_497158790350977_517323359_n

loading...
पेप्सी एक्‍वाफि‍ना का जो पानी बेचती थी, उसपर धोखा देने के लि‍ए बाकायदा उसने पहाड़ का लेबल भी चि‍पका रखा था। इससे लोग धोखे में रहते थे कि उन्हें जो पानी बेचा जा रहा है वह पूरी तरह शुद्ध है और उसे पहाड़ों से इकट्ठा कर फिल्‍टर करने के बाद बेचा जा रहा है। लेकिन अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार यूएसए टुडे ने अपनी हालिया रिपोर्ट में इस बात से पर्दा उठा दिया कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते एक्वाफिना ने मार्केट में मौजूद अपनी सभी बोतलों से अपना पुराना लेबल हटा लिया है और उसे ये धोखेबाजी बंद करनी पड़ी है।

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में छापा है कि कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह कुबूल किया कि कंपनी जो पानी अपने उपभोक्ताओं के बेच रही है वह नॉर्मल टैप वाटर (सामान्य नल का पानी) है। आम जनता अभी तक जो पैसे इन कंपनियों को प्रीमि‍यम पानी के नाम पर देती आई है वह एक प्रकार की ठगी थी।

इस बाबत पैप्सिको के प्रवक्ता मिशेल नॉट्रॉन ने बयान दिया है कि यह उचित कदम है। इससे लोग समझ सकेंगे कि उन्हे जो पानी पहाड़ का दृश्य दिखाकर बेचा जा रहा है वो उनके बाथरूम के सिंक में लगे नल से निकलने वाले पानी की तरह ही है। लोग भले ही इसके लिए अधिक पैसे देते हों लेकिन कंपनी उनको नल में आने वाला नॉर्मल वाटर ही बेच रही है।
2015_10$largeimg224_Oct_2015_185526263
भारतीय छात्रों के खि‍लाफ वि‍ज्ञापन बनाकर आलोचना झेल रही पेप्‍सी की मुसीबत और बढ़ गई है। पेप्‍सी ने माना है कि बाजार में एक्‍वाफि‍ना के नाम से जो पानी वह बेच रही है, दरअसल वो नल से आने वाला साधारण पानी है। वो भी उस नल का जो सड़कों पर या नुक्‍कड़ों पर लगा रहता है। अब नल का पानी कि‍तना साफ होता है, यह सब जानते ही हैं।

अभी तक पेप्‍सी एक्‍वाफि‍ना का जो पानी बेचती थी, उसपर धोखा देने के लि‍ए बाकायदा उसने पहाड़ का लेबल भी चि‍पका रखा था। इससे लोग धोखे में रहते थे कि उन्हें जो पानी बेचा जा रहा है वह पूरी तरह शुद्ध है और उसे पहाड़ों से इकट्ठा कर फिल्‍टर करने के बाद बेचा जा रहा है। लेकिन अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार यूएसए टुडे ने अपनी हालिया रिपोर्ट में इस बात से पर्दा उठा दिया कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते एक्वाफिना ने मार्केट में मौजूद अपनी सभी बोतलों से अपना पुराना लेबल हटा लिया है और उसे ये धोखेबाजी बंद करनी पड़ी है।

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में छापा है कि कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह कुबूल किया कि कंपनी जो पानी अपने उपभोक्ताओं के बेच रही है वह नॉर्मल टैप वाटर (सामान्य नल का पानी) है। आम जनता अभी तक जो पैसे इन कंपनियों को प्रीमि‍यम पानी के नाम पर देती आई है वह एक प्रकार की ठगी थी।

इस बाबत पैप्सिको के प्रवक्ता मिशेल नॉट्रॉन ने बयान दिया है कि यह उचित कदम है। इससे लोग समझ सकेंगे कि उन्हे जो पानी पहाड़ का दृश्य दिखाकर बेचा जा रहा है वो उनके बाथरूम के सिंक में लगे नल से निकलने वाले पानी की तरह ही है। लोग भले ही इसके लिए अधिक पैसे देते हों लेकिन कंपनी उनको नल में आने वाला नॉर्मल वाटर ही बेच रही है।

‘कन्वर्ज एक्स’ समुह के मुख्य बाजार रणनीतिकार ‘निक कोला’ ने बिजनेस इनसाइडर से हुई बातचीत में बताया कि किस तरह से कंपनी अपने उपभोक्ता से मोटी रकम कमाती हैं। वे बताते हैं कि बोतलबंद पानी के व्यवसाय में साल 2012 में कुल 9.7 बिलियन गैलेन पानी पर 11.8 बिलियन डॉलर की कमाई की।

poison_1436656277

CLICK ON NEXT BUTTON FOR NEXT SLIDE

loading...
शेयर करें