पेप्सी-कोक को भारत से भगाने के लिए तमिलनाडु से अभियान की हुई शुरुआत…

आप को कभी आश्चर्य हुआ कि कोका कोला वास्तव में क्या है ? नही ? कोइ बात नही, स्टेप बाय स्टेप समजीये हो जायेगा आश्चर्य ।

पीने के 10 मिनट के बाद : कोला की एक गिलास में रही चीनी के दस चम्मच, शरीर के चयापचय की क्रिया के अवरोध से उल्टि का कारण बनता है लेकिन फोस्फोरिक एसिड चीनी की इस कार्रवाई को रोकता है ।

20 मिनट के बाद : खून में इंसुलिन का स्तर बढ जाता है । लिवर चीनी को फॅट में बदल देता है ।

40 मिनट के बाद : कैफीन की घूस शरीर में पूरी तरह हो जाती है । आंख में भारीपन आता है । लिवर और खून की चीनी को निपने की प्रक्रिया के कारण रक्त दबाव बढ जाता है । Adenosine रिसेप्टर्स को अवरोध मिलता है, जीस से तंद्रावस्था या उनींदापन रोका जाता है और इस अवस्था को नकली ताजगी बताया जाता है ।

45 मिनट के बाद : शरीर डोपामाइन हार्मोन के उत्पादन को जन्म देता है, जो मस्तिष्क में रहे खुशी का अनुभव कराते केंद्र को उत्तेजित करता है, हेरोइन आपरेशन का ही ये एक सिद्धांत है ।

1 घंटे के बाद : फॉस्फोरिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क के मेल से पाचनतंत्र के मार्ग में चयापचय की क्रिया को बढा देता है । मूत्र के माध्यम से कैल्शियम का विमोचन भी बढ़ जाता है ।

बाद के समय में : मूत्रवर्धक प्रभाव का “खेल” शुरु होता है । कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिन्क, जो हमारी हड्डियों का हिस्सा है, साथ में सोडियम भी, शरीर से बाहर निकालने की क्रिया शुरु हो जाती है । एक कोका कोला में निहित पानी की पूरी मात्रा, मूत्र द्वारा निकाल दिया जाता है । मतलब हड्डी की धुलाई ।

क्या नकली ताजगी का आनंद उठाने के लिये कोक का एक ठंडा बोतल उठाते समय हम अपने गले में क्या रासायनिक “कॉकटेल” उतार रहे हैं हमें पता है ?

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