ताबिश सिद्दीकी का ब्लॉग: क्या हम उन्ही पतंजलि के वंशज हैं जिहोंने मन और शरीर पर विजय पायी थी?

Read Also : ब्लॉग: जब गाँव में होता था तो सुबह मेरी आँख दादी की तिलावत (कुरान पढ़ना) से खुलती थी

ब्लॉग: ( Tabish Siddiqui ) – कहते हैं पतंजलि ने ईसा से लगभग 400 वर्ष पूर्व अपने सूत्र लिखे थे जिन्हें हम “पतंजलि योग सूत्र” के नाम से जानते हैं। और ये सूत्र उन्होंने अपने से भी कहीं पहले हुवे पूर्वजों के ज्ञान से लिए थे। जब मनोविज्ञान का कहीं अता पता भी न था उस समय पतांजलि ने मन यानि माइंड को प्रमुख चार हिस्सों में विभाजित किया था। मनस, चित्त, बुद्धि और अहंकार।

Read Also : ब्लॉग : खुद अपने हाथ से शहजाद उसको काट दिया

हमारा मन इस संसार और उसकी चीज़ों को इंद्रियों (ध्वनि, स्पर्श, दृष्टि, स्वाद और गंध) द्वारा ग्रहण करता है। और मन का जो हिस्सा ये काम करता है वो मनस कहलाता है। मन का वो हिस्सा जो सोचता है और रूपरेखा बनाता है चीजों की, घटनाओं और अनुभवों की , भूत और भविष्य से, उसे चित्त कहते हैं। ये एक तरह से मेमोरी होती हैं। मन का जो हिस्सा इन घटनाओं और अनुभवों को रिकॉर्ड करता है और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें इस्तेमाल में लाता है वो बुद्धि कहलाता है। और मन के इन तीनो हिस्सों को मन का जो जागृत हिस्सा स्वयं से जोड़ता है और साक्षी होता है उसे अहंकार कहते हैं। अहंकार कहता है मैं ये हूँ, मुझे ये आता है या मुझे इतना ज्ञान है। मन एक नहीं होता है। मन चरणों में काम करता है और एक ध्यानी या योगी इन सभी हिस्सों को अलग अलग कर के देख सकता है।

Read Also : ब्लॉग: अलग-अलग हैं पाकिस्‍तान के दमादम मस्त कलंदर व झूलेलाल ?

मन शरीर को बस में कर सकता है इसलिए मन शरीर से बड़ा होता है। मगर मन का बस चित्त पर नहीं चलता है इसलिए चित्त मन से बड़ा होता है। बुद्धि के आगे चित्त हार जाता है इसलिए बुद्धि, चित्त और मन से बड़ी होती है मगर अहंकार के आगे सब घुटने टेक देते हैं इसलिए अहंकार, शरीर, मन, चित्त और बुद्धि से भी बड़ा होता है। अहंकार जिसे अंग्रेजी में ईगो कहते हैं ये सुप्रीम होता है.. सब से बड़ा।

Read Also : अभिजीत सिंह का ब्लॉग: पढ़िये जमात-अहमदिया, खालिस्तान और आर्य समाज की सच्चाई

मन के जिस विज्ञान को आधुनिक चिकित्सा जगत ने तमाम प्रयोगों और परिश्रम के बाद अब जा के जाना और स्वीकारा है उसे भारत में 400 ईसा पूर्व ही जान लिया गया था मगर उस समय और उसकी बाद की कई सभ्यताओं और देशों के लिए ये ज्ञान इतना गूढ़ और कठिन था कि इसे लगभग भुला दिया गया था। ये धार्मिक सूत्र नहीं हैं.. ये चिकित्सा विज्ञान के सूत्र हैं।

Read Also : मनीष सिंह का ब्लॉग : 14 फरवरी को विश्व मातृ-पितृ पूजन दिवस के लिए स्पेशल

इतने अद्भुत ज्ञान और समझ को अब भी खिल्ली में उड़ा दिया जाता है। भारत एक ऐसे दोराहे पर खड़ा है जहाँ दो कौड़ी की चीजों को बचाने के लिए दंगे हो रहे हैं और जंग हो वही है, और करोड़ों अरबों रुपए फूंके जा रहे हैं और जिस ज्ञान को बचाना है और जिस पर शोध करनी है उसे न तो कोई समाझता है और न ध्यान देता है। आध्यात्म मखौल बन के रह गया है और योग टीवी शो। अगर स्वामी बाबा रामदेव जी भगवा लपेट के पतांजलि को अपना आदर्श बना के न चले होते तो हम आज भी “पतंजलि योग सूत्र” का नाम तक नहीं जान पाते। “पतंजलि योग सूत्र” को पुन: प्रचारित करने वाले स्वामी रामदेव जी का मैं आभार प्रकट करना चाहता हूँ।

Read Also : ब्लॉग : दिल्ली का मौहम्मद तुगलक और अरविन्द केजरीवाल

स्वामी रामदेव जी को बिना समझे कुछ भी बोलने वालों को देखकर मुझे लगता है भारत भटक चुका है.. हमारा सारा मन भटक चुका है। हमारा अहंकार बर्बर सभ्यताओं की प्रस्तिस्पर्धा में लगा है और सारी बुराईयां जानते हुवे भी उन्ही जैसा बनना चाहता है। मुझे बहुत दुःख होता है और गहरी निराशा होती है ये सब देख कर।

Read Also : ब्लॉग : और ये भ्रम सिर्फ और सिर्फ विनाश की ओर ले जायेगा

क्या हम उन्ही पतांजलि के वंशज हैं जिहोंने मन और शरीर पर विजय पायी थी? जिन्होंने धर्मों और जातियों के उदय से पहले ही हमे ऐसा कुछ बता दिया था जिसे अगर हम अपनाये रहें तो अपने साथ साथ सारी पृथ्वी का सिर्फ कल्याण ही करेंगे।सोचिये इस मन के भेद को और चेतिये। देखिये कि मन का कौन सा हिस्सा आप पर हावी है।

Read Also : ब्लॉग : हे प्रभु, इन्हें क्षमा मत कर देना क्योंकि इन्हें पता है कि ये असत्य प्रचार कर रहें हैं