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पेनकिलर कभी ना खायें …. अगर किडनी बढ़िया रखनी है तो |
पैरासिटामॉल कभी ना खायें …. अगर शरीर, पेट आदि सभी अच्छा रखना है तो…. वो तो टी.वी. पे ऐसे ही दिखाते है “क्या हुआ सर दर्द हुआ कुछ लेते क्यों नही ?

हाँ पैरासिटामॉल, आह अच्छा हुआ | ” अच्छा नही हुआ पैरासिटामॉल से नही हुआ उसे रुपया मिला था… वो तो एक्टिंग कर रहा था और तुम सचमुच में खाकर ओर बीमार हो जाओ | पैरासिटामॉल है, पेनकिलर है, एंटीबायोटीक है, हे भगवान! बचके रहना इन एंटीबायोटीकों से और पेनकिलर से | घर पे पड़ी हो तो गटर में फेंक देना किसी को मुफ्त में भी मत देना |

फीके दूध में (गरम दूध हो) हल्दी डालकर पियो एंटीबायोटीक का बाप है | कभी एंटीबायोटीक की जरुरत पड़े तो शुद्ध हल्दी हो गरम दूध …शक्कर न डाला हुआ उसमे मिलके पियो |
दूध का दूध एंटीबायोटीक का एंटीबायोटीक …बढ़िया पेनकिलर दर्द होता है तो थोडा खानपान में ध्यान रखे ..जौ का दलिया और जौ के अट्टे की रोटी खायें, तो शरीर में अन्दर जहाँ भी सुजन है जिसके कारण तकलीफ होती है वो चली जायेगी |
जो आदमी जौ का दलिया और जौ की रोटी खाता है उसको बुढ़ापे में और जब तक जीयेगा तब तक किडनी ख़राब नहीं होती| आइए जानें, ऐसी ही कुछ दवाओं के बारे में जिनका बहुत अधिक सेवन फायदे की जगह नुकसान का कारण बनता है।

पेनकिलर – छोटे-छोटे दर्द पर पेनकिलर खाना फायदे का सौदा नहीं।

इस बारे में वरिष्ठ चिकित्सकों का मानना है कि अक्सर लोग दर्द के लिए ब्रूफेन, एस्पिरिन, कोंबिफ्लेम जैसी दवाएं ले तो लेते हैं लेकिन बार-बार पेनकिलर लेने
का नुकसान बड़ा होता है। सबसे बड़ी बात यह कि पेनकिलर दवाएं दर्द का इलाज नहीं हैं बल्कि दर्द से दिमाग को भटकाने में मदद करती हैं। इनके या इनके अलग-अलग कांबिनेशन के अधिक सेवन से एसिडिटी, उल्टी, डायरिया, पेट दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं जबकि लंबे समय तक ऐसी दवाएं लेना किडनी और ब्लड प्रेशर से संबंधित समस्याओं का सबब हो सकता है। ये दवाएं हड्डियों को कमजोर तक कर सकती हैं।

 

नींद की दवाएं – नींद की दवाओं पर अगर आपकी अधिक निर्भरता है तो कम से कम डॉक्टर की सलाह के बिना कोई प्रयोग कतई न करें।
एल्फैक्स, जेपलोन या डोर्मिन जैसी दवाओं के सेवन से आपको नींद तो आ जाएगी, लेकिन लंबे समय तक इनका इस्तेमाल आपको अवसाद, अनिद्रा और याददाश्त से संबंधित समस्याओं का शिकार बना सकता है।

 

नींद आने के लिए दवाओं से अधिक अपने रुटीन, एक्सरसाइज और डाइट पर ध्यान देना फायदेमंद है।

एंटीबायोटिक्स – खुद अपना इलाज करने की होड़ में आप कई बार एंटीबायोटिक दवाओं, पेनकिलर या दूसरी दवाओं से कांबिनेशन बनाकर लेते होंगे, इससे संक्रमण दूर हो या न हो लेकिन डायरिया, एलर्जी, त्वचा के रोग जैसे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। इनके अधिक इस्तेमाल से शरीर की प्रतिरोधी क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है।

 

पेट के लिए दवाएं – कांस्टिपेशन जैसी पेट की समस्याओं से राहत के लिए लोग अक्सर लूज़ सिरप या डुल्कोलक्स जैसी दवाएं लेते हैं लेकिन इनका लंबे समय तक इस्केमाल आंतों और किडनी के लिए अच्छा नहीं है।

डॉ. का मानना है कि इनके बजाय इसबगोल अब भी अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है।

 

कंट्रासेप्टिव दवाएं – चिकित्सकों के अनुसार, गर्भ निरोधक दवाओं जैसी एस्ट्रोजन इमरजेंसी कंट्रासेप्टिव पिल के लगातार सेवन से महिलाओं में दूध कम बनता और ये दवाएं मोटापे की वजह बन जाती हैं।

यही वजह है कि विदेशों में एस्ट्रोजन अब बैन है

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