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आपको भी मिल सकता है 'पद्म अवार्ड' अगर आपकी देश के गृह या वित्त मंत्री से दोस्ती है

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नई दिल्ली : सरकारों पर हर बार अपने करीबियों को पद्म अवार्ड देने के आरोप लगते रहे हैं। कांग्रेस की सरकार रही हों या वर्तमान मोदी सरकार कई ऐसे नामों को लेकर सोशल मीडिया में खूब चर्चा हुई। वहीँ अखबार इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की माने आरटीआई के जरिये उसे पता चला है कि सरकार ने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को पद्म अवार्ड दिए जिनके नाम नॉमिनीज सूची में थे ही नहीं और उनके नाम मंत्रालयों या मंत्रियों द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए। हालाँकि साल 2016 में सरकार ने इस बारे में जानकारी देने में हिचकिचाहट दिखाई। सूचना आयोग द्वारा आदेश देने के बावजूद भी सरकार इससे बचती रही।

मसलन साल 2015 में 104 लोगों को पद्म सम्मान दिया गया, जिनमे से 58 का नाम 1,840 लोगों की उस सूची से लिया गया जिनका नाम नामांकन के लिए प्रोसीजर के तहत भेज गया था। जबकि गृह मंत्रालय के सूत्रों ने अख़बार को बताया है कि 46 के नामों को गृह सचिव, गृह मंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा अपने स्तर पर राष्ट्रपति को भेजा गया।

साल 2016 में 112 लोगों को पद्म अवार्ड दिया गया जिनमे से 65 लोगों को 2,311 नामांकित लोगों की सूची से लिया गया था जबकि 47 लोगों का नाम लिस्ट से बाहर वाले लोगों का था। ऐसे में आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि खुद का नाम नामांकन में भेजने वालों को अवार्ड मिलने के बहुत ही कम आसार होते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार साल 2015 में 637 लोग ऐसे थे जिन्होंने खुद का नाम नामांकन के लिए भेजा था लेकिन उनमे से तीन को पद्म अवार्ड मिला। साल 2016 में यह आंकड़ा 720 लोगों का था जिनमे से सिर्फ 2 को चुना गया। साल 2015 में 17 लोगों को सिफारिश पर अवार्ड दिए गए, जिनमे से 8 को पांच केंद्रीय मंत्रियों द्वारा चयनित किया गया।

साल 2015 में पत्रकार रजत शर्मा, स्वपन दास गुप्ता और वकील हर्ष साल्वे को पद्म श्री दिलाने में वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा सिफारिश की गई थी। साल 2015 में लाल कृष्ण आडवाणी, प्रकाश सिंह बादल और अमिताभ बच्चन का नाम पद्म अवार्ड में नामांकन के बाहर से लिया गया था। वहीँ साल 2016 में रजनी कांत, श्री श्री रविशंकर, धीरूभाई अम्बानी का नाम नामांकन लिस्ट के बाहर से लिया गया था।

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