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“धान की सरकारी खरीद और मिलिंग में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने बड़े पैमाने पर गड़बड़‍‍ियां पकड़ी हैं। कैग की रिपोर्ट बताती है कि कैसे धान खरीद की सरकारी प्रणाली राइस मिलों के अनुचित लाभ का जरिया बन गई है। इन कमियों को दूर करने के साथ-साथ कैग ने सरकार से न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य का भुगतान सीधे किसानों के खातों में करने की सिफारिश की है। ”  
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धान की खरीद से लेकर ढुलाई और मिलिंग जैसी प्रक्रियाओं में कुल मिलाकर 40,564 करोड़ रुपये की अनियमिताएं सामने आई हैं। कैग की यह रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई है जिसमें कहा गया है कि इन गड़बड़‍ियों के चलते भारत सरकार के खाद्य सब्सिडी खर्च में इजाफा हुआ, जिससे बचा जा सकता था।

आगे पढ़े >> बाय-प्रोडक्‍ट से धान मिलों को 3,743 करोड़ की अनुचित कमाई 

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