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यूँ तो आपने खूब  सारे प्यार के किस्से सुने होंगे. कई कहानियों में दो प्यार करने वाले मिल जाते है तो कई कहानियों में दो प्रेमी बस एक दुसरे से मिलने कि चाहत में ही अपनी पूरी उम्र गुज़ार देतें है. लेकिन सच ही कहा है किसी नि कि प्यार और इंतज़ार कि कोई सीमा नहीं होती. ये एक ऐसा एहसास है जिसे आप जब तक महसूस करेंगे तब तक रहेगी. 

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ऐसी ही एक कहानी उत्तर प्रदेश के मेरठ से आई है जिसे सुनने के बाद आप भी कहेंगे कि इश्क कि कोई सीमा नहीं होती ये बेईम्तेहान और बेतहाशा होता है. दरअसल इस कहानी कि शुरुआत होती है बज्रघाट के एक धर्मशाला से जहाँ बिहार के तपेश्वर बबीता से मिलते है और दोनों को बिच प्यार हो जाता है. जब दोनों के बीच बात चीत का सिलसिला बढ़ता है तब तपेश्वर को पता चलता है कि बबीता को उसके परिवार वाले वहां छोड़ कर चले गए है. इसके बाद दोनों ने शादी कर लिया और ख़ुशी ख़ुशी एक दुसरे के साथ रहने लगे. लेकिन ऐसा ज्यादा दिनों तक नहीं चला शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था.

अगले पेज पर पढ़ें, तपेश्वर कई महीनों तक अपनी पत्नी के तलाश में दर-दर भटकते रहा कोई उसका मजाक उड़ाता था तो कोई सहानुभूति देता था लेकिन उसकी पत्नी…

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