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शरीर मे जो अम्लता (खटाई) का विष उत्पन्न होता है, नींबू उसको नष्ट करता है। नींबू में स्थित पोटेशियम अम्ल विषों को नष्ट करने का कार्य करता है। प्रचुर मात्रा में स्थित विटामिन ‘सी’ शरीर की रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है और स्कर्वी के रोगों में उपयोगी है। नींबू हृदय को स्वस्थ रखता है। हृदय के रोगों में अंगूर से भी अधिक लाभ करता है।

नींबू प्रतिअम्लक है। अन्य फलों की तुलना में इसमें क्षारीयता का प्रमाण अधिक है। नींबू का रस जंतुनाशक है। दोषी आहार-विहार के कारण शरीर में यूरिक एसिड बनता है। उसका नाश करने के लिए प्रातः खाली पेट में गर्म पानी नींबू का रस लेना चाहिए। अदरक का रस भी उपयोगी है। पेशाब द्वारा नींबू यूरिक ऐसिड को निकालता है। साथ-साथ कब्ज,पेशाब में जलन, लहू में खराबी, मंदाग्नि, रक्तविकार और त्वचा के रोगों के लिए तो यह अक्सीर इलाज है। नींबू के रस से दाँत और मसूढ़ों की अच्छी सफाई होती है। पायरिया और मुख की दुर्गन्ध को वह दूर कर देता है। यकृत की शुद्धि के लिए नींबू अक्सीर है। नींबू का साईट्रिक ऐसिड भी यूरिक एसिड का नाश करता है। अजीर्ण, छाती में जलन, संग्रहणी, कालेरा,कफ, सर्दी, श्वास आदि में औषधि का काम करता है। नींबू के रस में टाइफाईड के जंतुओं का तुरन्त नाश होता है। खाली पेट नींबू का रस अनुपयोगी विषैला एसिड पैदा करने वाले कृमि का नाश करता है। नींबू के सेवन से पित्त शांत होता है। मुँह में से पड़ती लार बंद होती है। डॉ. रेडीमेलर लिखते हैं कि थोड़े ही दिनों तक नींबू के सेवन से नींबू के रक्तशोधक गुण का पता चल जाता है। रक्तशुद्धि होते ही शरीर में खूब ताजगी महसूस होती है। लहू में से विषैले तत्त्वों का नाश होते ही शरीर की मांसपेशियों को नया बल मिलता है। नींबू समस्त शरीर की सफाई करता है। आँखों का तेज बढ़ाता है। जिन कुटुम्बों में लोग प्रतिदिन एक नींबू का उपयोग करते हैं, वहाँ प्रत्येक स्वस्थ, सुखी और प्रसन्न रहते हैं।

गर्म पानी में नींबू का रस शहद मिलाकर लेने से सर्दी, कफ, इन्फलुएन्जा आदि में पूरी राहत मिलती है। नींबू, शहद का पानी लेते रहकर लम्बे समय तक उपवास द्वारा चिकित्सा हो सकती है।

सावधानीः कफ, खाँसी,  दमा, शरीर में दर्द के स्थायी रोगियों को नींबू नहीं लेनी चाहिए। रक्त का निम्न दबाव, सिरदर्द आदि में नींबू हानिकारक है।

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