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फोटो – स्त्रोत

1947 जब देश आज़ाद हुआ उस समय, नेहरू और बाकि देश के नए शासकों की बैठक हुई बैठक का एजेंडा था की नए देश का नाम क्या होना चाहिए! जब बैठक हुई तो कांग्रेस के लोगो ने राय दी की, देश का नाम भारत होना चाहिये, पहले से ही भारत है और देश में हर कोई भी व्यक्ति देश को भारत ही कहता है, उस वक़्त कोई भारतीय देश को इंडिया नहीं कहता था, देश को इंडिया केवल अंग्रेज कहते थे।

कांग्रेस के लोगो ने कहा की भारत नाम से देश का गौरवशाली इतिहास जुड़ा हुआ है और देश के लोग भी खुश होंगे, सारी राय सुनने के बाद नेहरू बोले ”देश का नाम भारत रखने से पिछड़ापन का भाव आएगा, भारत नाम रहा तो भारत का इतिहास भी रहेगा जैसे महाभरत, रामायण, कोटिल्य शस्त्र आदि, विश्व में ये सन्देश जायेगा की पिछड़ा देश और पिछड़ा नाम” नेहरू ने सुझाव दिया की इंडिया नाम मॉडर्न और विकास का प्रतिक है, इसलिए देश का नाम इंडिया रखना चाहिये।

उस बैठक में नेहरू ने अपने छिपे निजी स्वार्थ में कहा की इंडिया नाम रखा जायेगा तो इतिहास बनेगा की नए देश का नाम मैंने रखा है तो भविष्य में इंडिया को मेरे नाम से जाना जाएगा, इस से मेरी आने वाली पीढ़ी भी देश पर राज करती रहेगी”। इस मुद्दे पर बहुत बहस हुई, परन्तु उस समय कांग्रेस में नेहरू का बोलबाला था इसलिए देश का नाम इंडिया थोपा गया, जिसे आज भी हम इंडिया के नाम से जानते हैं। कृपया ये जानकारी देश के कोने-कोने तक फैलाये, ज्यादा से ज्यादा लोगो को पता चलना चाहिए नेहरु के इस कुकर्म के बारे में, उनकी घटिया सोच के बारे में।

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