जवान वीरगति को प्राप्त होते हैं, उसका कारण "युद्ध" है या गले की फाँस बन गया "पाकिस्तान" ?

सो हाजी पीर दर्रे को पुनः प्राप्त करने के चक्कर में पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम की शुरुआत करी..!! इसी क्रम में सितम्बर 1965 के पहले सप्ताह में पाकिस्तानी सेना ने “सर्जिकल स्ट्राइक” की। उसके लगभग सवा सौ की संख्या में पाराट्रूपर्स भारतीय सरजमीं पर उतर गए हमारे एयरबेस को निशाना बनाने..

फिर पता है क्या हुआ..उनमें से मात्र 22 ही सही सलामत अपनी जान बचाकर वापस पाकिस्तान भाग पाए..!!

उधर पाकिस्तानी फ़ौज़ इस चक्कर में थी कि अगर अखनूर सेक्टर उनके कब्ज़े में आ जाए तो पूरा कश्मीर उन्हें मिल जायेगा..और यह बहुत हद तक सही भी था। सो भारतीय सेना ने अपनी पूरी ताकत लगा दी..पर यहाँ पाकिस्तानी फ़ौज़ भारी पड़ रही थी..इसी बीच पाकिस्तान ने एक रणनीतिक भूल कर दी..उसने कश्मीर में नेतृत्व कर रहे अपने मेजर जनरल अख़्तर हुसैन मलिक को हटाकर वहाँ याहिया खान को भेज दिया और इस बदलाव ने भारतीय सेना को सम्भलने का पर्याप्त मौका दे दिया..फिर क्या था..अखनूर हमारे कब्ज़े से निकला ही नहीं..!!

इस बीच भारतीय सेना ने कश्मीर पर से दबाव हटाने के लिए पंजाब में मोर्चा खोल दिया..पर यह क्या..हमारे तत्कालीन सेनाध्यक्ष, कोलकाता में पैदा हुए और ब्रिटिशर्स के सैंड्हर्स्ट कॉलेज के प्रोडक्ट, जयंतो नाथ चौधरी..जो 1962 में जनरल प्राण नाथ थापर द्वारा इस्तीफ़ा दिए जाने के कारण अचानक से वरिष्ठता के आधार पर सेनाध्यक्ष बन गए थे, ने पश्चिमी कमान के प्रमुख मेजर जनरल हरबख्श सिंह को आदेश दिया कि पंजाब में मोर्चा नहीं खोलना..!!

पर हरबख्श सिंह जी ने आदेश को नजरअंदाज किया और भारतीय सेना भिड़ गयी उधर..इधर पाकिस्तान के हाथ-पाँव फूल गए सो उसने भारतीय पंजाब के खेमकरण सेक्टर पर हमला बोल दिया ताकि उसके कब्ज़े में अमृतसर आ जाए। यहाँ सेनाध्यक्ष जयंतो नाथ चौधरी ने हरबख्श सिंह जी को फिर आदेश दिया कि भारतीय टुकड़ी को पीछे सुरक्षित स्थान पर ले आओ..!!